वाच्य

 वाच्य किसे कहते हैं :-

क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि क्रिया द्वारा संपादित विधान का विषय वाक्य में कर्ता है , कर्म है या भाव है उसे वाच्य कहते हैं।


वाच्य के प्रकार :-

1. कर्तृवाच्य


2. कर्मवाच्य


3. भाववाच्य


1. कर्तृवाच्य :- क्रिया के जिस रूप से वाक्य के कर्ता का या उद्देश्य का पता चले उसे कर्तृवाच्य कहते हैं। इसमें लिंग और वचन कर्ता के अनुसार होते हैं।


जैसे :- (i) बच्चा खेलता है।


(ii) घोडा भागता है।


2. कर्मवाच्य :-

क्रिया के जिस रूप से वाक्य में कर्ता के कर्म का पता चले उसे कर्मवाच्य कहते हैं इनकी रूप रचना कर्म के लिंग , वचन और पुरुष के अनुसार होती है।


जैसे :- (i) छात्रों द्वारा नाटक प्रस्तुत किया जा रहा है।


(ii) बच्चों के द्वारा निबन्ध पढ़े गये।


(iii) पुस्तक मेरे द्वारा पढ़ी गई।


3. भाववाच्य :-

क्रिया के जिस रूप से वाक्य का उद्देश्य भाव होता है। इसमें कर्ता और कर्म की प्रधानता नहीं होती है। इसमें अकर्मक क्रियाओं का प्रयोग किया जाता है।


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