मुहावरे के अर्थ वाक्य और विशेषताएं भाग- 2

मुहावरे के अर्थ वाक्य और विशेषताएं भाग- 2

ढ से शुरू होने वाले मुहावरे :

420. ढाई दिन की बादशाहत – (कम समय का सुख) – यह ढाई दिन की बादशाहत है कभ भी खत्म हो जएगी ।

421. ढाक के तीन पात – (हमेशा एक जैसा रहना) – मैंने जब भी उसे देखा है ढाक के तीन पात ही पाया है ।

422. ढिंढोरा पीटना – (सबको बताना) – उसने हमारी बातें सुन ली हैं वह तो सारे गाँव में ढिंढोरा पीत देगा ।

423. ढेर करना – (मार डालना) – बलराम ने अपने विरोधियों को ढेर कर दिया ।

424. ढील देना – (अपने वश में न रखना) – तुमने उसे बहुत ढील दे रखी है उसे अपने काबू में रखा करो ।

425. ढेर होना – (मर जाना) – अकबर के विरोधी उसके सामने ढेर हो गये ।

426. ढपोरशंख होना – (झूठा व्यक्ति) – तुम किशन से कुछ मत कहा करो वह तो ढपोरशंख व्यक्ति है ।

427. ढोल में पोल होना – (खाली होना) – उस वस्तु का वजन तो बहुत था पर उसमें था कुछ नहीं यह तो ढोल में पोल वाली बात हो गई ।

त से शुरू होने वाले मुहावरे :

428. तूती बोलना – (प्रभाव जमाना) – आजकल तो आपकी ही तूती बोल रही है ।

429.तकदीर चमकाना- (अच्छे दिन आना) – जब से उसे नौकरी मिली है उसकी तो तकदीर ही चमक गई ।

430. तख्ता उलटना – (बना हुआ काम बिगड़ना) – इस काम में मैने इतना कमाया था लेकिन तुमने दूसरा सौदा करके मेरा तख्ता उलट दिया ।

431. तबीयत फड़क उठना – (मन खुश होना) – पंकज उदास जी की गजलें सुनकर मेरी तो तबीयत ही फड़क उठी ।

432. तलवार के घाट उतारना – (मार देना) – श्रवण ने बहुत से द्रोहियों को अपनी तलवार के घाट उतार दिया ।

433. तलवे धो कर पीना – (खुशामद करना) – वह अपने मालिक के तलवे धोकर पिता रहा इसीलिए तो उसे आज अपने मालिक की सम्पत्ति में हिस्सा मिला ।

434. ताक में रहना – (मौका देखना) – मैं बहुत दिनों से तुम्हारी ताक देख रहा हूँ ।

435. ताना मारना – (व्यंग्य करना) – मेरे पिताजी हर छोटी -छोटी बात पर मुझे ताना मरते रहते है ।

436. तारे गिनना – (इंतजार करना) – मैं उनके आने तक रात भर तारे गिनता रहा ।

437. तारे तोड़ लाना – (असंभव काम करना) – उसने अपनी पत्नी से कहा की वह उसके लिए तारे भी तोड़ कर ला सकता है ।

438. तिनके का सहारा – (थोडा सहारा) – हम जैसे गरीबों के लिए तो तिनके का सहारा ही बहुत होता है ।

439. तिल का ताड़ कर देना – (बहुत बढ़ा चढ़ाकर कहना) – जितनी बात होती है उतनी ही कहनी चाहिए हमें तिल का ताड नहीं बनाना चाहिए ।

440.त्राहि-त्राहि करना – (बचाव के लिए गुहार करना) – जब से जमींदार किसानों पर अत्याचार करने लगे हैं तब से किसान त्राहि-त्राहि करने लगे हैं ।

441. तह देना – (दवाई देना) – डॉक्टर ने अपने मरीज को तह दी और मरीज उससे ठीक हो गया ।

442.तह -पर-तह देना – (खूब खाना) – कुंभकर्ण को खूब तह पर तह दिया जाता था क्योंकि वह बहुत विशाल था ।

443. तरह देना – (ध्यान न रखना) – डॉक्टर अपने मरीजों को तरह नहीं देता था इसलिय मरीज मर गया ।

444. तंग करना – (हैरान करना) – लवकेश ने मुझे बहुत तंग क्र दिया है ।

445. तंग हाथ होना – (गरीब होना) – आजकल हम कुछ खरीद नहीं सकते क्योंकि इस समय हमारा हाथ तंग है ।

446. तेवर बदलना – (क्रोध करना) – उससे कुछ कहना बेकार है उसके तेवर बदलते रहते हैं ।

447. तुक में तुक मिलाना – (खुशामद करना) – वह तो सामने तुक में तुक मिलाता है पर बाद में चुगली करता है ।

448. तोते की तरह आँखें फेरना – (बेमुरौवत होना) – उसके सामने कोई काम मत किया करो वह तोते की तरह ऑंखें फेरता रहता है ।

449. तार-तार होना – (बुरी तरह फटना) – उसके सामान से भरे थैले के तार-तार हो गये ।

450. तितर – बितर होना – (बिखर जाना) – उसके 6 भाई थे अब सब तितर बितर हो गये है ।

451. तेल की कचौड़ियों पर गवाही देना – (सस्ते में काम करना) – अदालत में उसने तेल की कचौड़ियों पर गवाही दी थी ।

452. तेली का बैल होना – (हर समय काम करना) – वह तो तेली के बैल की तरह है कभी थकता ही नहीं है ।

453. तिलांजली देना – (त्यागना) – धर्म ने अपनी पत्नी को तिलांजली दे दी ।

थ से शुरू होने वाले मुहावरे :

454. थुड़ी -थुड़ी करना – (धिक्कारना) – उसके नीच कर्म करने पर सभी उसके मुंह पर थुड़ी-थुड़ी कर रहे थे ।

455. थू थू करना – (लज्जित करना) – तुम्हारे कामों पर सब थू थू करेगे ।

456. थूककर चाटना – (वचन से मुकरना) – तुम जैसे आदमी पर कभी भी भरोषा नहीं करना चाहिए तुम तो थूककर चाटने लगते हो ।

457. थूक से सत्तू सानना – (बहुत कंजूसी करना) – मोहन से पैसे नहीं मिलेंगे वह तो थूक से सत्तू सानता है ।

459. थोथी बात होना – (बिना मतलब की बात होना) – पवन से बात करने का कोई फयदा नहीं है उसकी तो थोथी बात होती है ।

460. थाली का बैंगन होना – (अस्थिर विचारों वाला) – तुम उससे क्या कहते हो वह तो थाली का बैंगन है कभी इस तरफ तो कभी उस तरफ ।

461. थाह लेना – (पता लगाना) – तुम स्यम्सिंह के बारे में थाह लेकर आओ ।

462. थैली खोलना – (मन खोलकर खर्च करना) – हमें हमेशा थैली खोलकर खर्च करना चाहिए ।

द से शुरू होने वाले मुहावरे :

463. दांत खट्टे करना – पराजित करना – महारानी लक्ष्मीबाई ने युद्ध में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए ।

464. दाँतों तले उँगली दबाना – आश्चर्य प्रकट करना – सर्कस में छोटे से बच्चे के अद्भुत खेल को देखकर दर्शकों ने दाँतों तले ऊँगली दबा ली ।

465. दबी जबान से कहना – (धीरे-धीरे कहना) – नौकर ने अपनी बात मालिक से दबी जबान में कही जिससे उसके मालिक को सुनाई न दे ।

466. दम भरना – (विश्वास करना) – वह तो हमेशा अपनी दोस्ती का दम भरता रहता है ।

467. दर -दर मारा फिरना – (दुर्दशाग्रस्त घूमना) – पवन ने नौकरी छोड़ दी और अब वह दर-दर मारा फिर रहा है ।

468. दलदल में फसना – (मुश्किल में फसना) – वह गैर क़ानूनी कामों के दलदल में फस चूका है अब वह लौट नहीं सकता ।

469. दांतकटी रोटी होना – (पक्की दोस्ती होना) – नरेश और रमेश में दांतकटी रोटी जैसा सम्बन्ध है ।

470. दांत तोडना – (हराना) – अगर मुझसे कुछ उल्टा सीधा कहा तो मैं तुम्हारे दांत तोड़ दूंगा ।

471. दाँतों में तिनका लेना – (अधीनता स्वीकार करना) – वीर शिवाजी के सामने सभी लोक दाँतों में तिनका लेकर प्रस्तुत हुए ।

472. दाई से पेट छिपाना – (भेद छिपाना) – उसने मुझे अपना भेद बता ही दिया आखिर कब तक वह दाई से पेट छिपा पाता ।

473. दाना पानी उठना – (अन्न जल न मिलना) – जब उसने अपनी नौकरी छोड़ दी तो उसका घर से दाना पानी उठ गया ।

474. दाने-दाने को मुंहताज – (खाना न मिलना) – भिखारी दाने-दाने को मुंहताज हो गये हैं । 475. दाल गलना – (मतलब निकलना) – तुम्हारी दाल यहाँ पर नहीं गलेगी तुम कहीं और जाओ ।

476. दाल भात का कौर समझना – (बहुत आसान समझना) – यह काम बहुत मुश्किल है कोई दाल भात का कौर नहीं है ।

477. दाल में काला होना – (संदेह होना) – वे दोनों छिपकर कुछ बातें क्र रहे हैं जरुर दाल में कुछ काला है ।

478. दिन दूना रात चौगुना होना – (तरक्की मिलना) – उसने पैसा कमाने में दिन दूनी रात चौगुनी कर दी ।

479. दिल के फफोले फोड़ना – (मन की भडास निकलना) – उनकी अपने घर में तो चलती है नहीं गरीबों पर अपने दिल के फफोले फोड़ते रहते हैं ।

480. दिल्ली दूर होना – (लक्ष्य दूर होना) – अभी तो तुम एंटर में पास हुए हो और वकील बनने की सोच रहे हो अभी दिल्ली दूर है ।

481. दीन दुनिया भूल जाना – (सुध बुध न रहना) – गौतम बुद्ध ध्यान लगाने में दीन दुनिया को भूल गये ।

482. दिया लेकर ढूँढना – (परेशान होकर ढूँढना) – आजकल ईमानदार व्यक्ति दिया लेकर ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे ।

483. दुनिया की हवा लगना – (सांसारिक अनुभव होना) – जब से उसे दुनिया की हवा लगी है वह हम को भूल गया है ।

484. दुम दबाकर भागना – (कायर होना)- युद्ध में पाकिस्तानी सैनिक दुम दबाकर भाग गये ।

485. दूज का चाँद होना – (मुश्किल से दिखना) – अरे भाई तुम तो दूज का चाँद हो गये हो आजकल दीखते ही नहीं हो ।

486. दूध का दूध पानी का पानी करना – (सही न्याय करना) – न्यायधीश के फैसले ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया ।

487. दूध की लाज रखना – (माँ का सम्मान रखना) – पुष्प के बेटे ने उसके दूध की लाज रख ली ।

488. दूध की नदियाँ बहाना – (संपन्नता की भरमार होना) – वह तो अब इतनी उन्नति पर है की उनके यहाँ पर दूध की नदियाँ बहती हैं ।

489. दूध के दांत न टूटना – (अनुभवहीन होना) – गणेश अभी तुम्हारे दूध के दांत नहीं टूटे हैं पर मैंने ये दुनिया देखी है ।

490. दूधो नहाओ पूतो फलो – (धन और संतान मिले) – एक माँ ने अपने बेटे से कहा दूधो नहाओ पूतो फलो ।

491. दो दिन का मेहमान – (जल्दी मरनेवाला) – तुम उससे कुछ मत कहना वह तो बेचारा दो दिन का मेहमान है ।

492. दो नावों पर पैर रखना – (दो विरोधी काम साथ करना) – सुमेस दो नावों पर सवार होने वाले कभी भी मर सकते हैं ।

493. द्रविड़ प्रणायाम करना – (बात को घुमाकर कहना) – रानी हर बात को दूसरों से द्रविड़ प्रणायाम करने को कहती है ।

494. दौड़ धूप करना – (बहुत प्रयास करना) – उसने बहुत दौड़ धूप की पर उसे नौकरी नहीं मिली ।

495. दिन में तारे दिखाई देना – (घबरा जाना) – जब मैंने उसे मारा तो उसे दिन में तारे दिखाई दे गये ।

496. दो-दो हाथ करना – (युद्ध करना) – कृष्ण ने कंस से खा की आओ दो-दो हाथ करते हैं ।

497. द्रोपदी का चीर होना – (अनंत होना) – तुम्हारा यह काम तो द्रोपदी का चीर हो गया है ।

498. दिमाग आसमान पर चढना – (ज्यादा गर्व होना) – तुम राहुल से बात मत किया करो उसका दिमाग तो आसमान पर चढ़ रहा है ।

499. दोनों हाथों में लड्डू होना – (बहुत लाभ होना) – क्या करें उसके तो दोनों हाथों में लड्डू है ।

500. दूसरे के कंधे पर रखकर बंदूक चलाना – (दूसरे के माध्यम से काम करना) – अक्षय तो उन व्यक्तियों में से है जो दूसरों के कंधे पर रखकर बंदूक चलते हैं ।

501. दिल छोटा करना – (दुखी होना) – बहन दिल छोटा मत करो तुम्हारा बेटा जल्द ही घर लौट आएगा ।

502. दिन फिरना – (समय बदलना) – क्या करें जब से उसने भगवन को नमन करना शुरू किया है उसके तो दिन ही फिर गये ।

503. दबे पाँव चलना – (कोई आहट न करना) – अरे भाई दबे पाँव चलना अगर किसी को पता चल गया तो बहुत पिटाई होगी ।

504. दमड़ी के लिए चमड़ी उधेड़ना – (छोटी बात के लिए बड़ा दंड देना) – राजा कंस के सैनिक दमड़ी क लिए चमड़ी उधेड़ लेते हैं ।

505. दम तोड़ देना – (मर जाना) – अनुज भगवान के दर्शन करने गया था लेकिन उसने भगवान के मन्दिर में ही दम तोड़ दिया ।

506. दाँत पीसना – (गुस्सा करना) – रामू के पिता जी हमेशा उस पर दांत पिसते रहते हैं ।

507. दाँत पीसकर रहना – (गुस्सा होकर चुप रहना) – संजय के भाई ने उसे मरने के लिए कहा लेकिन वह दांत पीसकर रह गया ।

508. दाँत उखाड़ना – (कड़ा दण्ड देना) – सैनिकों ने उसके सारे दांत उखाड़ दिए लेकिन वह तब भी नहीं माना ।

509. दाहिना हाथ होना – (भारोषेवाला व्यक्ति) – नानू अपने मालिक का दाहिना हाथ था लेकिन वह मारा गया ।

510. दामन पकड़ना – (सहारा लेना) – राकेश ने सहारा लेने के लिए अपने बड़े भाई का दामन पकड़ लिया ।

511. दाव खेलना – (धोखा देना) – शकुनी ने पांडवपुत्रों के खिलाफ दाव खेला और उसमे सफल हो गया ।

512. दीदे का पानी ढल जाना – (बेशर्म होना) – हुमायु तो मानो दीदे के पानी ढलने के हैं ।

513. दिमाग खाना – (बकवास करना) – नैन्सी मेरा दिमाग मत खाओ मुझे बहुत काम है ।

514. दिल बढ़ाना – (साहस भरना) – आजकल लोग किसी के भी दुःख में उसका दिल नहीं बढ़ते है ।

515. दिल टूटना – (साहस टूटना) – अपनी प्रेमिका के मर जाने से उसका दिल बिलकुल टूट गया ।

516. दुकान बढ़ाना – (दुकान बंद करना) – मेरे पिताजी ने कहा की दुकान को बढ़ा क्र घर आ जाना ।

517. दिल दरिया होना – (उदार होना) – क्या करें बिचारे का दिल दरिया था इसलिय पिघल गया ।

518. दूर के ढोल सुहावने – (दूर से अच्छा होना) – लोग कहते हैं की दूर के ढोल ही सुहावने लगते हैं वरना सब एक जैसे होते हैं ।

ध से शुरू होने वाले मुहावरे :

519. धक्का लगाना – (दुःख होना) – आजकल किसानों का फसल में बहुत धक्का लगता है ।

520. धज्जियाँ उड़ाना – (दोष दिखाना) – शशि ने धोखेबाज की धज्जियाँ उदा दी ।

521. धता बताना – (टाल देना) – मैंने नेता जी से सहायता मांगी तो उन्होंने मुझे धता बता दिया ।

522. धरना देना – (सत्याग्रह करना) – आन्दोलनकारियों ने मंत्रीजी के खिलाफ धरना दे दिया ।

523. धुएँ के बादल उड़ाना – (भरी गप्पे मारना) – उसका कभी भी विश्वास मत करना वह तो धुएँ के बादल उड़ाने में बहुत माहिर है ।

524. धुन सवार होना – (काम पूरा करने की लगन होना) – उसको तो कविता बनाने की धुन सवार हो गई है जब तक ये काम पूरा नहीं होगा तब तक वह शांति से नहीं बैठेगा ।

525. धूप में बाल सफेद करना – (अनुभवहीन होना) – तुम्हे इस उम्र में इन सब बातों के बारे में नहीं पता है तो तुमने धूप में अपने बाल सफेद किये हैं ।

526. धुल फांकना – (मारा मारा फिरना) – रवि को पढने लिखने का काम तो है नहीं और धुल फांकता फिरता है ।

527. धुल में मिलना – (बर्बाद होना) – अपने से ताकतवर से लड़ाई करोगे तो धुल में मिल जाओगे ।

528. धोती ढीली होना – (डर जाना) – शेर को देखते ही लोगों की धोती ढीली हो गई ।

529. धोबी का कुत्ता – (बेकार आदमी) – उस आदमी की मुझसे मत पूछो वह तो धोबी का कुत्ता है कोई काम ही नहीं करता ।

530. धाक जमाना – (रॉब जमाना) – सुखदेव सब जगह अपनी धाक जमता फिरता है ।

531. धरती पर पाँव न रखना – (अभिमानी होना) – उसका बेटा विदेश से आया है इस वजह से वो धरती पर पाँव ही नही रख रहा है ।

532. धुआँ सा मुंह होना – (लज्जित होना) – जब वह फ़ैल हो गया तब वह धुआँ सा मुंह लेकर रह गया ।

न से शुरू होने वाले मुहावरे :

533. नमक मिर्च लगाना – (बढ़ा-चढ़ाकर कहना) – चुगलखोर व्यक्ति हमेशा नमक मिर्च लगाकर बातें करते हैं ।

534. नाक रगड़ना – (भूल स्वीकार करके क्षमा माँगना) – इन्सान को कोई ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे उसे दूसरों के सामने नाक रगडनी पड़े ।

535. नौ दो ग्यारह होना- (भाग जाना) – पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गये ।

536. नजर पर चढना – (पसंद आना) – रमेश की नजर मेरा पैन चढ़ गया इसलिए उसने मुझसे छीन लिया ।

537. नाक कट जाना – (इज्जत जाना) – तुम्हारे चोरी करते पकड़े जाने की वजह से हमारे खानदान की तो नाक ही कट गई ।

538. नाक का बाल होना – (प्रिय होना) – बीरबल बहुत चतुर थे इसीलिए वो अकबर की नाक के बाल हो गये ।

539. नाकों चने चबवा देना – (बहुत परेशान करना) – आजकल बिजली विभाग वाले घरों पर छापा मारकर नाकों चने चबा देते हैं ।

540. नाक भौं चढ़ाना – (नाराज होना) – गंदगी किसी को पसंद नहीं होती इसलिए सभी नाक भौं चढ़ाना शुरू कर देते हैं ।

541. नाक में दम करना – (बहुत तंग करना) – स्कूल के बच्चों ने तो मेरी नाक में दम क्र दिया ।

542. नानी याद आना – (होश उड़ना) – जब पुलिस ने चोर को पकड़ लिया तो चोर को नानी याद आ गई होगी ।

543. नीचा दिखाना – (अपमानित करना) – वह बहुत बोलता था एक न एक दिन उसे नीचा तो देखना ही था ।

544. नीला -पीला होना – (गुस्सा होना) – उसकी छोटी सी बात पर उसके पिताजी नील-पीले हो गये ।

545. न इधर का न उधर का – (कहीं का न होना) – दोनों जगह बैर करोगे टी न इधर के रहोगे न उधर के ।

546. नाच नचाना – (तंग करना) – वह उसे अपनी उँगलियों पर नाच नचाने लगा है ।

547. नुक्ताचीनी करना – (दोष निकालना) – तुम हर बात में नुक्ताचीनी मत किया करो बहुत मुश्किल से खाना मिलता है ।

548. निन्यानवे के फेर में पड़ना – (धन जुटाना) – तुम निन्यानवे के फेर में मत पड़ो जितना है उसी में खुश रहना सीखो ।

549. नजर चुराना – (आँखें चुराना) – तुम मुझे कुछ नहीं बताते हो आजकल मुझसे नजर चुराने लगे हो ।

550. नमक अदा करना – (फर्ज निभाना) – उसने उस घर का नमक खाया है अब नमक तो अदा करना ही पड़ेगा ।

551. नकेल हाथ मेँ होना – (वश मेँ होना) – उसकी नकेल तो जादूगर के हाथ में है वो जैसा कहेगा उसको करना होगा ।

552. नाक चोटी काटकर हाथ मेँ देना – (बुरा हल करना) – सुनीता ने बबिता की नाक चोटी काटकर हाथ में दे दी ।

553. नाक पर मक्खी न बैठने देना – (साफ होना) – उसके यहाँ पर इतनी सफाई है की नाक पर मक्खी तक नहीं बैठ सकती ।

554. नौ दिन चले ढाई कोस – (धीमी गति से कार्य करना) – तुम संजना से काम करने को मत कहो वह तो नौ दिन में ढाई कोस चलती है ।

555. नशा उतरना – (घमंड उतरना) – शिक्षा ने उसे उसकी सच्चाई बताकर उसका नशा उतर दिया ।

556. नदी नाव का संयोग – (इत्तिफाक से हुई मुलाकात) – इन दोनों का संयोग ऐसा मानो जैसे नदी और नाव का संयोग ।

557. नसीब चमकना – (भाग्य चमकना) – जब से वह भगवान की भक्ति में लीन हो गया है तब से उसकी किस्मत चमक रही है ।

558. नींद हराम होना – (न सोना) – इस काम को पूरा न कर पाने की वजह से मेरी तो नींद हराम हो गई है ।

559. नेकी और पूंछ-पूंछ – (बिना कहे भलाई करना) – उसने मुझे बताया भी नहीं और नेकी और पूंछ -पूंछ कह क्र काम को पूरा कर दिया ।

प से शुरू होने वाले मुहावरे :

560. पंचतत्व को प्राप्त करना – (मर जाना) – सुमन मरकर पंचत्व को प्राप्त हो गई ।

561. पगड़ी उछालना – (लज्जित करना) – शादी के मंडप में शर्त पूरी न होने पर लडके के पिता ने लडकी के पिता की पगड़ी उछाल दी ।

562. पगड़ी रखना – (मर्यादा की रक्षा करना) – आजकल की लडकियाँ पगड़ी रखना ही पसंद नहीं करती हैं ।

563. पत्थर की लकीर – (स्थायी) – युद्धिष्ठिर की बात को पत्थर की लकीर माना जाता था ।

564. पत्थर पर दूब जमना – (असंभव काम होना) – अश्व्थामा को मारना पत्थर पर दूब जमने के समान है ।

565. पत्थर से सिर फोड़ना – (असंभव के लिए कोशिश करना) – पत्थर से सिर फोड़ने से कुछ प्राप्त नहीं होगा जो कुछ हो सकता है वो करो ।

566. पहाड़ से टक्कर लेना – (अपने से बलवान से लड़ना) – तुम बलराम से लड़ाई करने के खाब मत देखो पहाड़ से टक्कर लेना आसान बात नहीं है ।

567. पाँव उखड़ जाना – (हार जाना) – पाकिस्तानी सेना के पाँव जंग से उखड़ गये ।

568. पाँव फूंक फूंक कर रखना – (सोचकर काम करना) – आज की सरकार पाँव फूक फूककर रखती है ।

569. पजामे से बाहर होना – (आपे से बाहर होना) – वह सच बात सुनकर आपे से बाहर हो गया ।

570. पानी की तरह पैसा बहाना – (अन्धाधुन्ध खर्च करना) – सीमा कुछ नहीं सोचती वह तो पानी की तरह पैसा बहती है ।

571. पानी पानी होना – (बेइज्जत होना) – चोरी करते पकड़े जाने पर वह पानी पानी हो गई ।

572. पानी में आग लगाना – (असंभव को संभव करना) – सुधा ने कहा की मैं पानी में आग लगा सकती हूँ ।

573. पिल पड़ना – (पूरी जान से लगना) – वह जिस काम को कर्ता है उसके पिल पड़ गये ।

574. पीठ ठोंकना – (शाबाशी देना) – जब शिवानी पास हो गई तो उसके अध्यापक ने उसकी पीठ ठोकी ।

575. पीठ दिखाना – (भाग जाना) – दुर्योधन युद्ध में पीठ दिखाकर भाग गया ।

576. पेट में चूहे दौड़ना – (जोरों की भूख लगना) – आज मुझे खाना न मिलने की वजह से मेरे पेट में चूहे दौड़ रहे हैं ।

577. पौ बारह होना – (लाभ का अवसर मिलाना) – जैसे ही वह अपने आफिस आया तो उसके पौ बढ़ हो गये ।

578. प्राण मुंह को आना – (बहुत दुःख होना) – उसकी हालत को देखकर मेरे तो प्राण मुंह को आ गये ।

579. प्राणों से हाथ धोना – (म्रत्यु को प्राप्त होना) – अभिमन्यु ने चक्रविहू में अपने प्राणों से हाथ धो दिए ।

580. प्राण हथेली में लेना – (मरने को तैयार होना) – भारतीय सैनिक अपने प्राणों को हथेली पर लेकर जंग लड़ते हैं ।

581. प्राणों की बाजी लगाना – (बहुत साहस करना) – भारतीय सेना ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर युद्ध जीता था ।

582. पोल खोलना – (राज प्रकट करना) – सब लोगों ने मिलकर सलमान की पोल खोल दी ।

583. पसीना-पसीना होना – (थक जाना) – आज श्याम ने सारा दिन काम किया जिससे वह पसीना पसीना हो गया ।

584. पहाड़ टूट पड़ना – (विपदा आना) – उसके इकलौते बेटे की मौत से उस पर तो दुखों का फाड़ टूट पड़ा ।

585. पाँचों उँगलियाँ घी में होना – (सब जगह से लाभ होना) – सरकार को गरीब की परवाह क्यूँ होगी उनकी तो पाँचों उँगलियाँ घी में होती है ।

586. पानी फेर देना – (निराश कर देना) – मैंने इतनी मुश्किल से लोगों को तुम्हारी नौकरी के लिए राजी किया था लेकिन तुमने सारे किये कराये पर पानी फेर दिया ।

587. पानी पी पीकर कोसना – (गलियां देते जाना) – मैंने उसे जरा सा कुछ कह क्या दिया वह तो मुझे पानी पी पीकर कोसने ही लगा ।

588. पापड़ बेलना – (व्यथ जीवन बिताना) – सरकारी नौकरी पाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते है ।

589. पेट बाँधकर रहना – (भूखे रहना) – वह अपने बच्चों को खिलने के लिए खुद पेट बाँधकर रह रहा है ।

590. पेट में दाढ़ी होना – (दिमाग से चतुर) – कुछ लोग सिर्फ सकल से भोले होते हैं लेकिन उनके पेट में दाढ़ी होती है ।

591. पैरों तले जमीन खिसकना – (होश उड़ जाना) – जब उसे अपने बेटे की मौत का पता चला तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई ।

592. पैरों में मेंहदी लगाकर बैठना – (जा न पाना) – जब उसने काम करने से मना कर दिया तो पिताजी ने उससे कहा की तुम्हारे पैरों में मेंहदी लगी है क्या ।

593. पट्टी पढ़ाना – (बुरी सीख देना) – उर्मिला सब बच्चों को उल्टी पट्टी पढ़ती रहती है ।

594. पाकेट गर्म करना – (रिश्वत देना) – आजकल लोग अफसरों की पाकेट गर्म करके अपना काम करवा लेते हैं ।

595. पहलू बचाना – (कतराना) – जब मैंने उसे देख लिया तो वह पहलु बचाकर निकल दिया ।

596. पते की कहना – (रहस्य की बात कहना) – एरेगोन ने तो जैसे मेरे पते की बात ख दी ।

597. पानी का बुलबुला – (क्षणभंगुर वस्तु होना) – वह तो पानी का बुलबुला है न जाने कब फूट जाये ।

598. पानी देना – (सींचना) – मैंने इस पेड़ को बहुत ही प्यार से पानी देकर बड़ा किया है ।

599. पानी न माँगना – (तभी मर जाना)- वह तो ऐसे मर गया की किसी से पानी भी नहीं माँगा ।

600. पानी पर नींव डालना – (अस्थिर वस्तु का आधार होना) – तुम लोग पानी पर नाव डालना बंद करो और अपने अपने घर जाओ ।

601. पानी पीकर जाति पूंछना – (काम होने के बाद उसकी सभ्यता का निर्णय करना) – तुम लोग उसे नहीं जानते वह तो पानी पीकर जाति पूंछ लेती है ।

फ से शुरू होने वाले मुहावरे :

602. फंदे में पड़ना – (धोखा खाना) – झगड़ा किसी और का था लेकिन फंदे में वह पड़ गया ।

603. फटेहाल होना – (बुरी हालत होना) – आजकल लोग गरीबी की वजह से फटेहाल हो गये है ।

604. फूंक से पहाड़ उड़ाना – (कम शक्ति से बड़ा काम होना) – तुम फूंक से पहाड़ उड़ने की बात मत करो यह तुम्हारे बस की बात नहीं है ।

605. फूटी आँखों न भाना – (अप्रिय होना) – सुप्रिया को अपना सौतेला बेटा फूटी आँख नहीं भाता है ।

606. फेर में डालना – (मुश्किल में डालना) – उसने किसी एक का चुनाव करने की कहकर मुझे फेर में दाल दिया ।

607. फूलकर कुप्पा होना – (खुशी से इतराना) – जब वह अपने बचपन के दोस्त से मिला तो वह फूलकर कुप्पा हो गया ।

608. फट पड़ना – (एकदम से गुस्सा आना) – जगमोहन एकदम से गुस्से से फट पड़ा ।

609. फूंक फूंक क्र कदम रखना – (सावधानी देखना) – आजकल के लोग फूंक फूंककर कदम रखते हैं ।

610. फूलना-फलना -(धन और कुल होना) – एक माँ ने अपने बेटे से आशीर्वाद देते समय कहा की फूलो – फ्लो ।

611. फफोले फोड़ना – (वैर होना) – उसकी मुझसे दुश्मनी है इसलिए मैं उसके हमेशा फफोले फोड़ता रहता हूँ ।

612. फब्तियां कसना – (ताना मारना) – जब सिक्षा कक्षा में फेल हो गई तब उसके पिता ने उस पर खूब फब्तियां कसीं ।

613. फूल झड़ना – (मीठा बोलना) – जब शशि बोलती हैतो ऐसा लगता है जैसे फूल झड़ रहे हो ।

ब से शुरू होने वाले मुहावरे :

614. बगलें झाँकना – (बेइज्जत होकर चारों तरफ देखना ) – जब कर्जा न चुकाने की वजह से वह सब जगह बगलें झाँकने लगा ।

615. बट्टा लगाना – (कलंक लगाना) – उसने अपनी परिवार की इज्जत पर बट्टा लगा दिया ।

616. बरस पड़ना – (क्रोध से बातें सुनाना) – शिवानी मुझ पर बिना किसी बात के बरस पड़ी ।

617. बाग बाग होना – (खूब खुश होना) – जब उसे अपने पास होने की बात का पता चला तो वह बाग बाग हो गया है ।

618. बाजी ले जाना – (आगे निकलना) – मिल्खा सिंह ने दौड़ में बाजी ले ली ।

619. बात चलाना – (शुरू करना) -आजकल तो मेरी शादी की बातें चल रही हैं ।

620.बात काटना -( बीच में बोलना) – छोटों को बड़ों की बात काटना उचित नहीं है ।

621. बातों में आना – (धोखा खाना) – तुम लोग सोहन की बातों में आ जाते हो वह तो धोखेबाज है ।

622. बाल बाँका न होना – (हानि न होना) – संजना के प्रेमी ने उससे कहा की वह उसका बाल भी बाँका नहीं होगा ।

623. बाल की खाल निकलना – (बिना मतलब की बात करना) -बात की खाल निकलने से अच्छा अपने अपने काम में ध्यान दो ।

624. बासी कढ़ी में उबाल आना – (बुढ़ापे में जवानी की आशा करना) – आजकल लोगों में बासी कढ़ी में उबाल आने की बातें होती हैं ।

625. बीड़ा उठाना – (जिम्मेदारी लेना) – सूर्य पुत्र कर्ण ने अंग देश की प्रजा को आजादी दिलाने का बीड़ा उठाया था ।

626. बुखार उतारना – (गुस्सा करना) – सोहन के पिता ने खा की मैं दो मिनट में तेरा बुखार उतार दूंगा ।

627. बेडा पार लगाना – (मुसीबत से निकालना) – अब तो भगवान ही हमारा बेडा पर लगा सकते हैं ।

628.बे सिर पैर की बात करना – (बिन मतलब की बात करना) – तुम लोग बेसिर पैर की बातें करना छोड़ो और अपना अपना काम करो ।

629. बेवक्त की शहनाई बजाना – (अवसर के खिलाफ काम करना) – वे लोग तो उल्टे हैं बेवक्त की शहनाई बजाते रहते हैं ।

630. बोलती बंद करना – (बोलने नहीं देना) – मैंने गलत काम करने के लिए मना किया लेकिन वह नहीं माना तो मैंने उसकी बोलती बंद कर दी ।

631. बौछार करना – (अधिक देना) – कन्यादान करते समय लडकी के पिता ने पैसे की बौछार कर दी ।

632. बन्दर घुड़की – (बेकार धमकी देना) – तुम बन्दर घुड़की मत दिया करो तुम से कुछ नहीं होगा ।

633. बखिया उधेड़ना – (राज खोलना) – 1921 में महात्मा गाँधी ने अंग्रेजों की बखिया उधेड़ दी ।

634. बछिया का ताऊ – (मूर्ख) – वह तो बछिया का ताऊ है जिस टहनी पर बैठा है उसी को काट रहा है ।

635. बड़े घर की हवा खाना – (जेल जाना) – सतवीर ने शराब का काम किया और फस गया तो उसे बड़े घर की हवा खानी पड़ी ।

636. बल्लियों उछलना – (बहुत खुश होना) – क्रिकट में जितने पर भारत के खिलाडियों ने बल्लियाँ उछाल दी ।

637. बाएँ हाथ का खेल – (आसान काम) – तुम लोग इसे बाएँ हाथ का खेल मत समझो यह बहुत मुश्किल काम है ।

638. बाँछे खिल जाना – (बहुत खुश होना) – पवन को देखते ही उसके तो बाँछे खिल गये ।

639. बाजार गर्म होना – (धंधा अच्छा चलना) – आजकल तो बाजार बहुत गर्म हो रहा है इसमें बहुत लोगों को बहुत लाभ मिल रहा है ।

640. बात का धनी होना – (वादे का पक्का होना) – कार्तिक तो बात का धनी है जो ख देता है पूरा करता है ।

641. बिल्ली के गले में घंटी बंधना – (खुद को परेशानी में डालना) – जब लोग बिल्ली के गले में घंटी बाँधते रहते हैं ।

642. बेपेंदी का लोटा – (पक्ष बदलने वाला) – अनीता तो दोनों तरफ अपनी बातें सुनती है वह तो बेपेंदी के लोटे की तरह है ।

643. बगुला भगत – (छलने वाला) – भरत की मत पूछो वह उपर से सीधा है लेकिन अंदर से बगुला भगत है ।

644. बहती गंगा में हाथ धोना – (दूसरे के काम से लाभ उठाना) -जब वह अपना काम करवाने गया था तो मैंने भी उसका काम बनता देख अपना भी काम बना लिया यह तो बहती गंगा में हाथ धोने वाली बात है ।

भ से शुरू होने वाले मुहावरे :

645. भंडा फूटना – (राज खुलना) -सब लोगों के सामने ही उसका भंडा फूट गया ।

646. भानुमती का पिटारा – (अलग अलग चीजों का पात्र) – संग्रहालय को भानुमती का पिटारा माना जाता हैक्योंकि वहाँ पर सभी प्रकार की वस्तुएं मिल जाती हैं ।

647. भार उठाना – (उत्तरदायित्व लेना) – वह अपनी बहन का भर उठाकर आजतक उसे पूरा कर रहा है ।

648. भार उतारना – (ऋण से मुक्त होना) – उसने ऋण चूका के अपना भर उतार लिया ।

649. भूत सवार होना – (बहुत क्रोध आना) – वह किसी की भी बात नहीं सुन रहा है उसके सिर पर तो बहुत सवार है ।

650. भौंह चढ़ाना – (गुस्सा आना) – जब उसने विरोधी की बातें सुनी तो उसकी भौंह चढने लगीं ।

651. भाड़ झोंकना – (समय बर्बाद करना) – उस पर भाड झोंकने के अलावा और कोई काम नहीं है ।

652. भाड़े का टट्टू – (पैसे लेकर काम करने वाला) – पैसों से कितने भी भाड़े के टट्टू खरीदे जा सकते हैं ।

653. भीगी बिल्ली बनना – (सहमना) – वह तो दूसरे के सामने भीगी बिल्ली बन जाता है ।

654.भैंस के आगे बिन बजाना – (मूर्ख आदमी को उपदेश देना) – अनपढ़ों को पढ़ाना भैंस के आगे बीन बजाने के बराबर है ।

655. भेड़ियाधसान होना – (देखा -देखी करना) – तुम लोग क्यूँ लोगों के घर जा जाकर भेड़ियाधसान हो रहे हो होना वही है जो किस्मत में लिखा है ।

656. भरी लगना – (असहय होना) – कमजोर व्यक्ति को जरा सा भर भी ज्यादा लगता है ।

657. भनक पड़ना – (खबर लगना) – अगर लूं को हमारे बुरे कामों के बारे में भनक भी पड़ गई तो बहुत बुरा होगा ।

म से शुरू होने वाले मुहावरे :

658. मक्खी की तरह निकाल देना – (किसी को काम से अलग कर देना) – जब लोगों को लगा की अब 6 व्यक्तियों की जरूरत नहीं है तो उसने उसे मक्खी की तरह निकाल क्र फेंक दिया ।

659. मक्खी मारना – (निकम्मा होना) -वह तो बस मक्खी मरता फिरता है उसे कोई और काम आता ही नहीं ।

660. मगज खाना – (परेशान करना) – उसने सवाल पूंछ पूंछ क्र मेरा तो मगज ही खा लिया ।

661. मुट्ठी गर्म करना – रिश्वत देना -आजकल कोई भी काम बिना मुट्ठी गर्म किये नहीं होता ।

662. मुँह में पानी भर आना – (जी ललचाना)- आइसक्रीम देखकर नीता के मुंह में पानी भर आया।

663.मजा किरकिरा होना – (रंग में भंग डलना) – जब पुलिस शराब खाने में आ गई तो शराबियों का मजा किरकिरा हो गया।

664. मन की मन में रहना – (इच्छा अधूरी रहना) – उसके बेटे की शादी पर उसकी मन में मन रह गई।

665. मन में लड्डू खाना – (व्यर्थ खुश होना) – जब उसे अपनी शादी का पता चला तो उसके मन में लड्डू फूटने लगे।

666. मन मैला करना – (अप्रसन्न होना) – जब भी कोई शुभ काम होता है तो न जाने क्यूँ कमल का मन मैला हो जाता है ।

667. मशाल लेकर ढूँढना – (अच्छे से ढूँढना) – विराट कोहली जैसा खिलाडी हमें मशाल लेकर ढूंढने पर भी नहीं मिलेगा ।

668. माथे पर बल पड़ना – (चहरे पर गुस्सा होना) – कोई भी गलत बात को सुनकर माथे पर बल ले ही आएगा ।

669. मारा मारा फिरना – (बुरी तरह घूमना) – जब अर्जुन की नौकरी चली गई तो वह मारा मारा फिरने लगा ।

670. मिटटी के मोल बिकना – (सस्ता होना) – सदर बाजार में वस्तुएं मिटटी के मोल बिकती हैं ।

671. मिटटी पलीद करना – (बुरी धस करना) – मेरे बने बनाए काम की तुमने मिटटी पलीद कर दी ।

672. मुंह की खाना – (लज्जित होना) – दुर्योधन जब हार गया तो उसे बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी थी ।

673. मुंह काला करना – (बदनामी होना) – दुष्कर्मों की वजह से समाज ने लक्ष्मी का मुंह काला कर दिया ।

674. मुंहतोड़ जवाब देना – (सबक सिखाना) – युद्ध में हिंदुस्तान ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था ।

675. मुंहदेखी कहना – (तारीफ करना) – वह किसी की सच्चाई नहीं जनता बस मुंहदेखी कहता रहता है ।

676. मुंहमांगी मुराद पाना – (मन चाहा मिलना) – मुंहमांगी मुराद पाने के लिए बहुत मेहनत करनी पडती है ।

677. मुंह में पानी भर आना – (लालच आना) – जब लोग मरीज के सामने मसालेदार खाने की बात क्र रहे थे तो मरीज के मुंह में पानी भर आया ।

678. मुंह में लगाम न होना – (ज्यादा बोलना) – बबिता के मुंह मेलागम नहीं है वह बहुत ज्यादा बोलती है और फिर रूकती भी नहीं है ।

679. मुंह मोड़ना – (विमुख होना) – लोगों की बातों पर विश्वास करके उसने अपने सच्चे दोस्त से मुंह मोड़ लिया ।

680. मुठ्ठी गरम करना – (घूस देना) – आजकल के ओफिसर बस अपनी मुठ्ठी गरम करने में लगे रहते हैं ।

681. मैदान साफ होना – (बाधा न होना) – मैदान साफ होने की वजह से वे खेल आसानी से जीत गये ।

682. मैदान मारना – (जीत जाना) – उसने प्र्त्योगिता में सभी राज्यों से मैदान मार लिया ।

683. मौत का सिर पर खेलना – (मरने वाला) – रमेश के सिर पर मौत खेल रही है पता नहीं अगले दो पल में क्या हो जाये ।

684. मेढकी को जुकाम होना – (अनहोनी होना) – पर्वत को उठाना मेंढकी को जुकाम होने के बराबर समझा जाता है ।

685.मक्खन लगाना – (चापलूसी करना) – मुन्सी मक्खन लगाकर मालिक सी अपनाकाम निकलवा लेता है ।

686. मिटटी का माधो – (बिलकुल मूर्ख) – वह दुनिया को बिलकुल नहीं जानता वह तो मिटटी का माधो है ।

687. मिटटी खराब करना – (बुरी हालत करना) – पहलवानी में लुट्टन ने शेर कहाँ की मिटटी खराब क्र दी ।

688. मुंह खून लगना – (घूस लेने की आदत पड़ना) – अगर शेर के मुंह खून लग जाये तो वह खतरनाक हो जाता है ।

689. मुंह छिपाना – (बेइज्जत होना) – कुकर्म करने की वजह से उसे अपना मुंह छिपाना पद रहा है ।

690. मुंह रखना – (मान रखना) – रिश्तेदारों ने अपने लोगों की बात का मान रख लिया ।

691. मुंह पर कालिख पोतना – (कलंक लगना) – झूठी बातों की वजह से निर्दोष लोगों के मुंह पर कालिख पुत गई ।

692. मुंह उतरना – (दुखी होना) – शादी के टूटने की खबर से उसका मुंह उतर गया ।

693. मुंह ताकना – (दूसरों पर निर्भर) – हमे कभी भी किसी का मुंह नहीं ताकना चाहए हमें स्वंय के पैरों पर खड़ा होना चाहिए ।

694. मोहर लगा देना – (पुष्टि करना) – आजकल सब लोग बातों पर मोहर लगा दिया करते हैं ।

695. मर मिटना – (नष्ट होना) – पहले लोग एक दूसरे के लिए मर मिटने को तैयार रहते थे लेकिन आज एक दूसरे से बोलते भी नहीं हैं ।

696. मांस नोचना – (परेशान करना) – उसने पीछे डोल डोल क्र मेरा तो मास ही नोच लिया है ।

697. मोम हो जाना – (नर्म बनना) -लोगों को आजकल कोई नहीं समझ सकता कभी बहुत गुस्सा करते हैं और कभी मोम बन जाते हैं ।

698. मन फट जाना – (फीका पड़ना) – लोगों को साथ देखकर कुछ लोगों के मन फट जाते हैं ।

699. मीन मेख करना – (बेकार तर्क) – तुम लोग मीन मेख करना बंद करो और जल्द से जल्द काम को पूरा करो ।

700. मोटा आसामी – (अमीर आदमी) – सुनार तो आज के समय में मोटे आसामी हो गये हैं क्योंकि आजकल सब सोना बहुत खरीदते हैं ।c

701. मुठभेड़ होना – (मुकाबला होना) – जब लुट्टन की शेर खां से मुठभेड़ हुई थी तो शेर खां को मुंह की खानी पड़ी ।

य से शुरू होने वाले मुहावरे :

702. यश कमाना – (नाम कमाना) – लोगों को यश कमाने में बहुत साल लग जाते हैं लेकिन गवाने में एक पल नहीं लगता ।

703. यश मिलना – (सम्मान मिलना) – युधिष्ठिर को उनकी बुद्धि की वजह से यश मिली थी ।

704. यश गाना – (तारीफ करना) – गुरु द्रोणाचार्य जी अर्जुन का यश गाते रहते है ।

705. यश मानना – (कृतज्ञ होना) – पंचाल ने यज्ञ करते समय यश मानने की गलती की थी ।

706. युग-युग – (दिनों तक) – महाभारत का युद्ध युग युग तक चला था ।

707. युग धर्म – (समय से चलना) – युग धर्म ही इस प्रकृति की पहचान मानी जाती है ।

708. युगांतर उपस्थित करना – (नई प्रथा चलाना) – श्रवण ने मोहनजोदड़ो में युगांतर उपस्थित किया था ।

र से शुरू होने वाले मुहावरे :

709. रंग उखड़ना – (मजा बिगड़ना) – दुर्घटना की वजह से सारे रंग उखड़ गये हैं ।

710. रंग उड़ना – (हैरान होना) – अपनी माँ की मौत की खबर से उसके चहरे के रंग उड़ गये ।

711. रंग जमना – (तारीफ बढ़ाना) – मेरी शादी में मेरे दोस्त ने रंग जमा दिया ।

712. रंग में भंग पड़ना – (मजे में विघ्न आना) – दुर्घटना से होली के रंगों में भंग पड़ गया ।

713. रंग लाना – (असर दिखाना) – कुछ ही वर्षों में लोगों के बीच महात्मा गाँधी ने रंग ला दिया था ।

714. राई का पहाड़ बनाना – (बढ़ा कर कहना) – अनीता को राई का पहाड़ बनाना बहुत अच्छी तरह से आता है ।

715. रोंगटे खड़े होना – (डरना) – रात को आवाजें सुनकर उसके रोंगटे खड़े हो गये ।

716. रफू चक्कर होना – (भाग जाना) – पुलिस को देखते ही चोर रफू चक्कर हो गया ।

717. रात दिन एक करना – (मेहनत करना) – लडकी का विवाह करने के लिए उसने रात दिन एक कर दिया ।

718. रंग में भंग पड़ना – बाधा पड़ना – सीमा के विवाह में वर्षा आ जाने के कारण रंग में भंग पड़ गये ।

719. रोटी के लाले पड़ना – (खाने को तरसना) – अन्न जल उठने से उसको रोटी के लाले पड़ गये हैं ।

720. रोड़ा अटकना – (बाधा पड़ना) – अच्छे काम में हमेशा रोड़ा अटकता है ।

721. रौनक जाना – (चमक खत्म होना) – बच्चों के चले जाने से घर की रौनक भी चली जाती है ।

722.रंगा सियार होना – (धोखा देने वाला) – कुछ लोगों का कोई भरोसा नहीं होता वे रंगा सियार जैसे होते हैं ।

723. रोम रोम खिलना – (बहुत खुश होना) – अपने परिवार से फिर मिलकर उसका तो रोम रोम खिल उठा ।

724. रसातल चला जाना – (बिलकुल खत्म होना) – आग लगने से लाक्षाग्रह का रसातल चला जाता है ।

725. रीढ़ टूटना – (आधार खत्म होना) – बेटे के मरने से उसका तो मानो रीढ़ ही टूट गया हो ।

726. रोटियां तोडना – (बैठकर खाना) – वह बेरोजगार है उसे रोटियां तोड़ने के सिवा कोई और काम नहीं है । 727. रोना-रोना – (दुःख सुनाना) – जब कभी भी हम दूसरों के घर जाते हैं तो उनका रोना रोना ही लगा रहता है

ल से शुरू होने वाले मुहावरे :

728. लाल पीला होना – क्रोधित होना – अधिक लाल पीला होना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ।

729. लोहे के चने चबाना – अत्यधिक कठिन कार्य – पढना आसन नहीं वरन लोहे के चने चबाना है ।

730. लंबी तानना – (सोना) – कुंभकर्ण लम्बी तान कर सोया कर्ता था उसे जगाना बहुत मुश्किल हो जाता था ।

731. लकीर का फकीर होना – (अन्धविश्वासी होना) – जो भगवान की जगह ढोंगियों पर विश्वास करता है वह लकीर का फकीर हो जाता है ।

732. लपेट में आ जाना – (घिरना) – पांडवों को मारने वाले आग की लपेट में आ गये थे ।

733.लंबी चौड़ी हाँकना – (डींगें हाँकना) – बात तो छोटी थी लेकिन कुशल ने उसे लम्बी चौड़ी हंकनी शुरू कर दी ।

734. लल्लो चप्पो करना – (खुशामद करना) – कभी भी बच्चों के पीछे लल्लो चप्पो नहीं करना चाहिए वे बिगड़ जाते हैं ।

735. लड़ाई में काम आना – (लड़ते हुए मरना) – बहुत से सैनिक युद्ध में काम आये लेकिन फिर भी युद्ध को जीता नहीं जा सका ।

736. लहू का प्यासा होना – (मरने पर उतरना) – वह तो लहू का प्यासा हो गया है किसी भी तरह से शांत नहीं हो रहा है ।

737. लुटिया डुबोना – (नष्ट करना) – पवन ने बने बनये काम की लुटिया डुबो दी ।

738. लोहा मानना – (हारना) – महात्मा गाँधी ने विदेशियों से लोहा मनवा लिया था ।

739. लोहा नहीं मानना – (हार न मानना) – भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना से अभी तक लोहा नही माना है ।

740. लेने के देने पड़ना – (नुकसान होना) – पिताजी ने काम शुरू किया लेकिन काम में लेने के देने पड़ गये ।

741. लंगोटी में फाक खेलना – (कम साधन होते हुए भी विलासी होना) – घर में वस्तु न होते हुए भी लंगोटी में फाक खेलने से कोई फायदा नहीं है ।

742. लाख से लाख होना – (सब कुछ नष्ट होना) – लाक्षाग्रह में आग लगने की वजह से सब लाख से लाख हो गया था ।

743. लाले पड़ना – (मुहताज होना) – उसके लिए दाने दाने के लाले पड़ रहे है वह पता नहीं अपना पेट कैसे भरता होगा ।

744. लंगोटिया यार – (बचपन का दोस्त) – स्याम और घनस्याम दोनों लंगोटिया यार हैं एक दूसरे के लिए जान भी दे सकते हैं ।

745. लहू होना – (मुग्ध होना) – वह तो हर किसी की बातों पर लहू हो जाता है ।

746. लग्गी से घास डालना – (दूसरों पर गेरना) – जब लोगों ने सुधा को नशा करते देखा तो उसने लग्गी से घास डालना शुरू कर दिया ।

747. लट्टू होना – (मोहित होना) – वह उसके रूप को देखकर उस पर लट्टू हो गया ।

748. ललाट में लिखा होना – (भाग्य में होना) – जो कुछ हुआ वो हमारी ललाट में लिखा हुआ था अब रोने से कोई फायदा नहीं ।

749. लातों के भूत बातों से नहीं मानते – (शरारती समझाने से नहीं समझते) – आजकल के बच्चे तो इस तरह के हैं की लातों के भूत बातों से नहीं मानते ।

750. लहू पसीना एक करना – (बहुत मेहनत करना) – अपने बेटे को पढ़ाने के लिए उसने लहू पसीना एक कर दिया था ।

व् से शुरू होने वाले मुहावरे :

751. वक्त पर काम आना – (कष्ट में साथ देना) – जो लोग वक्त पर काम आते हैं वही सच्चे मित्र होते हैं ।

752. वचन देना – (वादा करना) – दशरथ ने कैकयी से वादा किया था कि तुम मुझसे कोई भी तीन वचन मांग सकती हो ।

753. वार खाली जाना – (योजना असफल होना) – जब दुर्योधन का वार खली चला गया तो वह बहुत ही दुखी हो गया था ।

754. वीरगति को प्राप्त होना – (युद्ध में मरना) – युद्ध में कई सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए थे ।

755. वचन हारना – (जबान हारना) – कुछ लोग झूठा वचन देते हैं लेकिन वचन बहुत जल्दी हार जाते हैं ।

756. विष उगलना – (कडवी बातें करना) – सुमन बातें नहीं करती वह तो विष उगलती है ।

स से शुरू होने वाले मुहावरे :

757. सनक सवार होना – (धुन लगना) -उसे तो पुलिस बनने की सनक सवार हो गई है ।

758. सन्नाटे में आना – (बिलकुल शांत हो जाना) – जब कक्षा में साँप आ गया तो आवाजें सन्नाटे में बदल गयीं ।

759. सन रह जाना – (सदमा लगना) – जब बच्चों को उनके सहपाठी की मौत का पता लगा तो बच्चे सन्न रह गये ।

760. सबको एक डंडे से हाँकना – (सबको एक जैसा समझना) – सबको एक डंडे से हाँकना तो सुषमा कीआदत है वह लोगों को पहचानती नहीं है ।

761. सब्जबाग दिखाना – (झूठा भरोसा देना) – एक धोखेबाज ने सब्जबाग दिखाकर मुझे लुट लिया ।

762. साँप छुछुदर की दशा – (सोच में डालना) – हम लोगों ने सिनेमा जाने का निर्णय लिया था लेकिन पिताजी ने स्कूल जाने की कहकर उसे साँप छुछुदर की दशा में डाल दिया ।

763. सिट्टी पिट्टी गुल होना – (होश उड़ जाना) – गलत काम करने वाले पुलिस को देखते ही उनकी सिट्टी पिट्टी गुल हो जाती है ।

764.सिर आँखों पर रखना – (सम्मान करना) – मेहमान भगवान होता है इसलिए उन्हें सिर आँखों पर रखा जाता है ।

765. सिर उठाना – (विरुद्ध होना) – तुम राजा के हर फैसले पर सिर मत उठाया करो ।

766. सिर के बल जाना – (शन्ति से पास जाना) – तुम कितना गुस्सा करते हो उसे देखो वह तो सिर के बल सबके पास जाता है ।

767. सिर पर खून चढना – (बहुत क्रोधित होना) – कोई कान्हा से बात नहीं करेगा उसके सिर पर खून सवार है ।

768. सिर पर कफन बांधना – (मरने को तैयार रहना) – भरिय सैनिक सिर पर कफन बांध कर निकलते हैं ।

769. सीधी ऊँगली से घी न निकलना – (शन्ति से काम न बनना) – लोगों का मानना है की जब घ सधी ऊँगली से न निकले तो ऊँगली टेढ़ी करने में ही भलाई है ।

770. सीधे मुंह बात न करना – (घमंड से बात करना) -जब से उन लोगों के पास दौलत आई है वे लोग किसी से सीधे मुंह बात ही नहीं करते हैं ।

771. सीनाजोरी करना – (बल देना) – एक तो चोर ने चोरी की ऊपर से हम से सीनाजोरी और क्र रहा है ।

772. सूरज को दीपक दिखाना – (गुणवान को उपदेश देना) – तुम उसे सिख मत दिया करो वह तो सूरज को भी दिया दिखा सकता है ।

773. सर्द हो जाना – (डरना) -जब उसने दुर्घटना को होते हुए अपनी आँखों से देखा तो वह सर्द हो गया ।

774. समझ पर पत्थर पड़ना – (अक्ल नष्ट होना) – जब वे लोग तुम्हे कोड़े मार रहे थे तब तुम्हारी अक्ल पर पत्थर पड़ गये थे क्या ?

775. सिक्का जमाना – (प्रभाव जमाना) – राजा के लोग पहले अपना सिक्का जमाते हैं फिर लोगों के साथ दुष्टता करते हैं ।

776. स्व सोलह आने सही - (पूरी तरह ठीक) - राजा बहुत ही कायर होते हैं यह बात स्व सोलह आने सच है ।

777. सिर पर आ जाना – (पास आना) – मुझे पता ही नही चला कि वह मेरे सिर पर आ खड़ा हुआ ।

778. सिर खुजलाना – (बहलाना) – वह तो हमेशा से ही बच्चों का सिर खुजलाती आई है ।

779. सिर धुनना – (अफ़सोस करना) – जब तुमसे गलती हो जाएगी तब सिर धुनने से भी कोई फायदा नहीं होगा ।

780. सर गंजा कर देना – (बहुत पीटना) – पुलिस ऑफिसर ने गुंडों को पीट पीटकर उनका सिर गंजा कर दिया ।

781. सफेद झूट – (बिलकुल झूट) – सुनीता तो सच कभी बोलती ही नहीं है वह तो सफेद झूंठ बोलती है ।

782. सितारा चमकना – (भाग्य जागना) – जब से वह भगवान का ध्यान लगाने लगा है उसका तो सितारा ही चमकने लगा है ।

783. सात पांच करना – (आगे पीछे करना) – सुनीता लोगों के बीच सात पांच करती रहती है ।

784. सुबह का चिराग होना – (अंत पर आना) – जब लोगों की मौत आने वाली होती है तब उन्हें सुबह का चिराग होने का आभास होता है ।

785. सैंकड़ों घड़े पानी पड़ना – (बेइज्जत होना) – जब उसके भाई ने उसे घर से निकाल दिया तो सैंकड़ों घड़े पानी पड़ गये ।

786. सब धान बाईस पसेरी – (सबसे एक जैसा व्यवहार करना) – रेखा को तो देखो वह तो सब धान बाईस पसेरी हो गई है ।

787. साँप को दूध पिलाना – (बुरे की रक्षा करना) – जब साँप को दूध पिलाओगे तो किसी न किसी दिन मारे जाओगे ।

788. साँप सूंघ जाना – (अचानक शांति होना) – महामारी की खबर से सारे गाँव को साँप सूंघ गया ।

789. सात घाट का पानी पीना – (अनुभवी होना) – तुम उससे जीत नहीं सकते उसने पुरे सात घाट का पानी पिया है ।

790. सिंदूर चढ़ाना – (विवाह करना) – माँ बाप ने अपनी लडकी को बालिक होने से पहले ही सिंदूर चढ़ा दिया ।

791. सिर मुंडाते ओले पड़ना – (काम होने पर बाधा आना) – काम अभी शुरू भी नहीं हुआ था और मुश्किले आने लगीं ऐसा लगता है जैसे सिर मुंडाते ही ओले पड़ने लगे हों ।

792. सिर से बला टलना – (मुसीबत जाना) – जब लोगों को लगा कि अब सारे मेहमान जाने वाले हैं तो उन्हें लगा की उनके सिर से बला तल गई ।

793. सिर पर मौत खेलना – (मौत आना) – जब लोगों के सिर पर मौत आती है तो वे किसी की नहीं सुनते हैं ।

794. सिर धड की बजी लगाना – (मरने से न डरना) – पहले जमाने के लोग सिर धड की बाजी लगाया करते थे ।

795. सिर ओखली में देना – (मुसीबत में स्वंय पड़ना) – हम क्या कर सकते हैं जब उसे खुद ही सिर को ओखली में डालने की आदत हो गई हैं ।

796. सिर से पानी गुजरना – (सहनशीलता खत्म होना) – उसके दोस्त ने उसका बहुत मजाक उड़ाया लेकिन जब पानी सिर से गुजर गया तो उससे चुप नहीं रहा गया ।

797. सिर पर पाँव रखकर भागना – (बहुत तेज भागना) -पाकिस्तानी सैनिक युद्ध से सिर पर पाँव रखकर भागे थे ।

798. सींग काटकर बिछोड़े में मिलना – (बूढ़े होकर बच्चों जैसा काम करना) – उन लोगों को तो देखो सींग काटकर बिछोड़े में मिलने की बात कर रहे हैं ।

799. सूखे धान पर पानी पड़ना – (हालत अच्छी होना) – पहले वे लोग क्या थे लेकिन अब तो ऐसा लगता है जैसे सूखे धान पर पानी पड़ गया हो ।

800. सोने की चिड़िया हाथ से निकलना – (लाभ न मिलना) – जब शिकारी के हाथ से शिकार निकल गया तो उसे लगा जैसे सोने की चिड़िया हाथ से निकल गई हो ।

801. सोने पर सुहागा होना – (लाभ ही लाभ होना) – हमे वैसे तो नौकरी मिल ही रही थी लेकिन खाली समय में दूसरा काम मिलना तो सोने पर सुहागा है ।

802. सौ सुनार की एक लुहार की – (अनेक कष्टों पर एक सुख भारी होना) – अमीर के सौ कष्टों के बदले गरीब का एक कष्ट ही भारी पड़ता है ।

803. सावन हरे न भादो सूखे – (हमेशा एक सी व्यवस्था न रहना) – कभी भी सावन हरे न भादो सूखे की अवस्था नहीं होती है ।

श, ष , श्र से शुरू होने वाले मुहावरे :

804. शहद लगाकर चाटना – (व्यर्थ चीज को बचाना) – स्याम तुम शहद लगाकर चटना बंद करो और जीवन में आने वाले कष्टों पर ध्यान दो ।

805. शान में बट्टा लगाना – (इज्जत कम होना) – छोटी नौकरी करने से तुम्हारी शान में बट्टा नहीं लग जायेगा ।

806. शामत सवार होना – (संकट आना) – पिताजी तुम्हारी सारी शरारतें जान चुके हैं अब तुम्हारी सामत सवार हुई है ।

807. शेखी बघारना – (डींगें मारना) – तुम लोग व्यर्थ शेखी बघारना बंद करो और अपने काम पर ध्यान दो ।

808. शर्म से गढ़ जाना – (बहुत लज्जित होना) – जब वह कर्ज नहीं चूका पाया तो शर्म से गढ़ गया ।

809. शर्म से पानी पानी होना – (बहुत लजाना) – जब लडकी की शादी की बातें हो रही थीं तब लडकी शर्म से पानी पानी हो गई ।

810. शैतान की आंत – (बड़ी बातें) – अगर तुम रोहन के पेस बैठोगे तो तुम्हे शैतान की आंतें सुनने को मिलेंगी ।

811. शैतान की खाला – (झगड़ालू औरत) – बबिता से कोई भी नहीं जीत सकता है वह तो शैतान की खाला है ।

812. शिकार हाथ लगना – (असामी मिलना) – जब शिकारी को कोई शिकार हाथ लग जाता है तो उसकी तुलना वह खजाने से करता है । 813. शैतान के कान कतरना – (चालाक होना) – तुम उसकी तुलना नहीं कर सकते हो वह तो शैतान के भी कान कतर सकता है । 814. षटराग अलापना – (रोना धोना) – जब उसके घर कोई भी नुकसान हो जाता है तो लोग षटराग अलापते रहते हैं ।

815. श्री गणेश करना – (काम की शुरुआत करना) – जब भी लोग कोई शुभ काम शुरू करने वाले होते हैं तब वो कहते हैं की चलो श्री गणेश करते है ।

816.ऋण चुकाना – (कर्ज उतारना) – उसने अपना ऋण चूका कर राजा से अपना पीछा छुड़ा लिया ।

ह से शुरू होने वाले मुहावरे :

817. हवा से बातें करना – (तेज दौड़ना) – मिल्खासिंह तो हवा से बातें किया करते थे लेकिन आज के लोग जरा सा काम करने से ही थक जाते हैं ।

818. हवा पीकर रहना – (बिना खाने के रहना) – वह किसान अपने बच्चों को खाना देकर खुद हवा पीकर रह जाता है ।

819. हक्का बक्का रह जाना – (हैरान हो जाना) – मास्टरजी की मौत की खबर सुनकर सब लोग हक्के बक्के रह गये ।

820. हँसी उड़ाना – (मजाक करना) – जमुना की गरीबी पर उसकी कक्षा की लडकियाँ उसकी हँसी उड़ाती है ।

821. हाथ धोकर पीछे पड़ जाना – (किसी काम में लग जाना) – वह तो नौकरी पाने के लिए मेरे पीछे हाथ धोकर पीछे पड़ गया है ।

822. हाथ तंग होना – (गरीब होना) – जब बेटे ने पढाई के लिए पैसे मांगे तो माँ ने नहीं दिए क्योंकि उनका हाथ तंग था ।

823. हथियार डाल देना – (हर मान लेना) – महात्मा गाँधी जी की बातें सुनकर भारतीय गुंडों ने हथियार डाल दिए थे ।

824. हाँ में हाँ मिलाना – (खुशामद करना) – मेहमान को भगवान माना जाता है इसलिए लोग उनकी हाँ में हाँ मिलते रहते है ।

825. होश उड़ जाना – (डर जाना) – भूत को देखते ही उसके तो होश ही उड़ गये ।

826. हौसला पस्त होना – (उत्साह खत्म होना) – पाकिस्तान को हारता देख पाकिस्तानी लोगों के हौंसले पस्त हो गये ।

827. हाथ पैर मारना – (कोशिश करना) – उसने बहुत हाथ पैर मारे लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी ।

828. हाथ खाली होना – (गरीब होना) – दान दे दे कर अब तो राजा के हाथ खली हो जाते हैं लेकिन लोगों को संतुष्टि नहीं मिलती ।

829. हाथ पे हाथ धरकर बैठना – (जिसे काम न हो) – सोमू तो हाथ पर हाथ धरकर बैठ जाएगा लेकिन उनका क्या जो लोग काम करते हैं ।

830. हाथों के तोते उड़ना – (हैरान होना) – पैसों को न मिला देखकर उसके तो हाथों के तोते उड़ गये ।

831. हाथ मलते रह जाना – (पछतावा होना) – जब लोग तुम से दूर हो जाएंगे तब तुम हाथ मलते रह जाओगे ।

832. हवाई किले बनाना – (कल्पना में उड़ना) – मेहनत करने वाले जीवन में सफल होते हैं , हवाई किले बनाने वाले नहीं ।

833. हाथ पाँव फूलना -(घबरा जाना)- डाकुओं को देखकर आशीष के हाथ पाँव फूल गये ।

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