प्रत्यय


प्रत्यय की परिभाषा, भेद और उदाहरण

प्रत्यय :

प्रत्यय दो शब्दों से मिलकर बना होता है – प्रति +अय। प्रति का अर्थ होता है ‘ साथ में ,पर बाद में ‘ और अय का अर्थ होता है ‘ चलने वाला ‘।अत: प्रत्यय का अर्थ होता है साथ में पर बाद में चलने वाला। जिन शब्दों का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता वे किसी शब्द के पीछे लगकर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं।

प्रत्यय का अपना अर्थ नहीं होता और न ही इनका कोई स्वतंत्र अस्तित्व होता है। प्रत्यय अविकारी शब्दांश होते हैं जो शब्दों के बाद में जोड़े जाते है।कभी कभी प्रत्यय लगाने से अर्थ में कोई बदलाव नहीं होता है। प्रत्यय लगने पर शब्द में संधि नहीं होती बल्कि अंतिम वर्ण में मिलने वाले प्रत्यय में स्वर की मात्रा लग जाएगी लेकिन व्यंजन होने पर वह यथावत रहता है।

जैसे :-

समाज + इक = सामाजिक

सुगंध +इत = सुगंधित

भूलना +अक्कड = भुलक्कड

मीठा +आस = मिठास

लोहा +आर = लुहार

नाटक +कार =नाटककार

बड़ा +आई = बडाई

टिक +आऊ = टिकाऊ

बिक +आऊ = बिकाऊ

होन +हार = होनहार

लेन +दार = लेनदार

घट + इया = घटिया

गाडी +वाला = गाड़ीवाला

सुत +अक्कड = सुतक्कड़

दया +लु = दयालु

प्रत्यय के प्रकार :-

(क) संस्कृत के प्रत्यय

(ख) हिंदी के प्रत्यय

(ग) विदेशी भाषा के प्रत्यय

(क) संस्कृत के प्रत्यय क्या होते हैं :-

संस्कृत व्याकरण में जो प्रत्यय शब्दों और मूल धातुओं से जोड़े जाते हैं वे संस्कृत के प्रत्यय कहलाते हैं ।

जैसे :- त – आगत , विगत , कृत ।

संस्कृत प्रत्यय के प्रकार :-

1. कृत प्रत्यय

2. तद्धित प्रत्यय

1. कृत प्रत्यय क्या होते हैं :-

वे प्रत्यय जो क्रिया या धातु के अंत में लगकर एक नए शब्द बनाते हैं उन्हें कृत प्रत्यय कहा जाता है ।कृत प्रत्यय से मिलकर जो प्रत्यय बनते है उन्हें कृदंत प्रत्यय कहते हैं । ये प्रत्यय क्रिया और धातु को नया अर्थ देते हैं । कृत प्रत्यय के योग से संज्ञा और विशेषण भी बनाए जाते हैं ।

जैसे :- लिख +अक = लेखक

अक प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं:-

(i) लेख, पाठ, कृ, गै , धाव , सहाय , पाल लेखक , पाठक , कारक , गायक , धावक , सहायक , पालक आदि । अन प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(ii) पाल् , सह , ने , चर , मोह , झाड़ , पठ , भक्ष + अन = पालन , सहन , नयन , चरण , मोहन , झाडन , पठन , भक्षण आदि । ना प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(iii) घट , तुल , वंद ,विद + ना = घटना , तुलना , वन्दना , वेदना आदि । अनिय प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(iv) मान , रम , दृश्, पूज्, श्रु + अनिय= माननीय, रमणीय, दर्शनीय, पूजनीय, श्रवणीय आदि । प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(v) सूख, भूल, जाग, पूज, इष्, भिक्ष् , लिख , भट , झूल +आ = सूखा, भूला, जागा, पूजा, इच्छा, भिक्षा , लिखा ,भटका, झूला आदि । प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(vi) लड़, सिल, पढ़, चढ़ , सुन + आई = लड़ाई, सिलाई, पढ़ाई, चढ़ाई , सुनाई आदि । प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(vii) उड़, मिल, दौड़ , थक, चढ़, पठ +आन = उड़ान, मिलान, दौड़ान , थकान, चढ़ान, पठान आदि । प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(viii) हर, गिर, दशरथ, माला + इ = हरि, गिरि, दाशरथि, माली आदि । प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(ix) छल, जड़, बढ़, घट + इया = छलिया, जड़िया, बढ़िया, घटिया आदि । प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(x) पठ, व्यथा, फल, पुष्प +इत = पठित, व्यथित, फलित, पुष्पित आदि । प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(xi) चर्, पो, खन् + इत्र = चरित्र, पवित्र, खनित्र आदि । प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(xii) अड़, मर, सड़ + इयल = अड़ियल, मरियल, सड़ियल आदि । प्रत्यय = उदाहरण इस प्रकार हैं

(xiii) हँस, बोल, त्यज्, रेत , घुड , फ़ांस , भार + ई = हँसी, बोली, त्यागी, रेती , घुड़की, फाँसी , भारी आदि ।

(xiv) इच्छ्, भिक्ष् + उक = इच्छुक, भिक्षुक आदि ।

(xv) कृ, वच् + तव्य = कर्तव्य, वक्तव्य आदि ।

(xvi) आ, जा, बह, मर, गा + ता = आता, जाता, बहता, मरता, गाता आदि ।

(xvii) अ, प्री, शक्, भज + ति = अति, प्रीति, शक्ति, भक्ति आदि ।

(xviii) जा, खा + ते = जाते, खाते आदि ।

(xix) अन्य, सर्व, अस् + त्र = अन्यत्र, सर्वत्र, अस्त्र आदि ।

(xx) क्रंद, वंद, मंद, खिद्, बेल, ले , बंध, झाड़ + न = क्रंदन, वंदन, मंदन, खिन्न, बेलन, लेन , बंधन, झाड़न आदि ।

(xxi) पढ़, लिख, बेल, गा + ना = पढ़ना, लिखना, बेलना, गाना आदि ।

(xxii) दा, धा + म = दाम, धाम आदि ।

(xxiii) गद्, पद्, कृ, पंडित, पश्चात्, दंत्, ओष्ठ् , दा , पूज + य = गद्य, पद्य, कृत्य, पाण्डित्य, पाश्चात्य, दंत्य, ओष्ठ्य , देय , पूज्य आदि ।

(xxiv) मृग, विद् + या = मृगया, विद्या आदि ।

(xxv) गे +रु = गेरू आदि ।

(xxvi) देना, आना, पढ़ना , गाना + वाला = देनेवाला, आनेवाला, पढ़नेवाला , गानेवाला आदि ।

(xxvii) बच, डाँट , गा, खा ,चढ़, रख, लूट, खेव + ऐया \ वैया = बचैया, डटैया, गवैया, खवैया ,चढ़ैया, रखैया, लुटैया, खेवैया आदि ।

(xxviii) होना, रखना, खेवना + हार = होनहार, रखनहार, खेवनहार आदि ।

कृत प्रत्यय के भेद :-

1. कर्तृवाचक कृत प्रत्यय

2. विशेषणवाचक कृत प्रत्यय

3. भाववाचक कृत प्रत्यय

4. कर्मवाचक कृत प्रत्यय

5. करणवाचक कृत प्रत्यय

6. क्रियावाचक कृत प्रत्यय

1. कर्तृवाचक कृत प्रत्यय क्या होता है :-

जिस शब्द से किसी के कार्य को करने वाले का पता चले उसे कर्तृवाचक कृत प्रत्यय कहते हैं ।

जैसे :-
अक = लेखक , नायक , गायक , पाठक

अक्कड = भुलक्कड , घुमक्कड़ , पियक्कड़

आक = तैराक , लडाक

आलू = झगड़ालू

आकू = लड़ाकू , कृपालु , दयालु

आड़ी = खिलाडी , अगाड़ी , अनाड़ी

इअल = अडियल , मरियल , सडियल

एरा = लुटेरा , बसेरा

ऐया = गवैया , नचैया

ओडा = भगोड़ा

वाला = पढनेवाला , लिखनेवाला , रखवाला

हार = होनहार , राखनहार , पालनहार

ता = दाता , गाता , कर्ता , नेता , भ्राता , पिता , ज्ञाता ।

2. विशेषण वाचक कृत प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्यय के क्रियापदों से विशेषण शब्द की रचना होती है उसे विशेषण वाचक कृत प्रत्यय कहते है ।

जैसे :-

त = आगत ,विगत ,कृत

तव्य = कर्तव्य ,गन्तव्य

य = नृत्य ,पूज्य , खाघ

अनीय =पठनीय ,पूजनीय ,शोचनीय ।

3. भाववाचक कृत प्रत्यय क्या होता है :-

भाववाचक कृत प्रत्यय वे होते हैं जो क्रिया से भाववाचक संज्ञा का निर्माण करते हैं ।

जैसे :-

अन = लेखन , पठन , गमन , मनन , मिलन

ति = गति , रति , मति

अ = जय , लेख , विचार , मार , लूट , तोल

आवा = भुलावा , छलावा , दिखावा , बुलावा , चढावा

आई = कमाई , चढाई , लड़ाई , सिलाई , कटाई , लिखाई

आहट = घबराहट , चिल्लाहट

औती = मनौती , फिरौती , चुनौती , कटौती

अंत = भिडंत , गढंत

आवट = सजावट , बनावट , रुकावट , मिलावट

ना = लिखना , पढना

आन = उड़ान , मिलान , उठान , चढ़ान

आव = चढ़ाव , घुमाव , कटाव

आवट = सजावट , लिखावट , मिलावट

4. कर्मवाचक कृत प्रत्यय क्या होता है :-

जिस प्रत्यय से बनने वाले शब्दों से किसी कर्म का पता चले उसे कर्मवाचक कृत प्रत्यय कहते हैं ।

जैसे :-

औना = बिछौना , खिलौना

ना = सूँघना , पढना , खाना

नी = सुँघनी , छलनी

गा = गाना ।

5. करणवाचक कृत प्रत्यय क्या होता है :-

जिस प्रत्यय की वजह से बने शब्द से क्रिया के करण का बोध होता है उसे करणवाचक कृत प्रत्यय कहते हैं ।

जैसे :-

आ = भटका , भूला , झूला

ऊ = झाड़ू

ई = रेती , फांसी , भारी , धुलाई

न = बेलन , झाडन , बंधन

नी = धौंकनी , करतनी , सुमिरनी , छलनी , फूंकनी , चलनी

6. क्रिया वाचक कृत प्रत्यय क्या होता है :–

जिस प्रत्यय के कारण बने शब्दों से क्रिया के होने का भाव पता चले उसे क्रिया वाचक कृत प्रत्यय कहते हैं ।

जैसे :-

ता = डूबता , बहता , चलता

या = खोया , बोया

आ = सुखा , भूला , बैठा

ना = दौड़ना , सोना

कर = जाकर , देखकर

कृत प्रत्यय के प्रकार :-

1. विकारी कृत प्रत्यय

2. अविकारी कृत प्रत्यय

1. विकारी कृत प्रत्यय क्या होता है :-

विकारी कृत प्रत्यय में शुद्ध संज्ञा तथा विशेषण बने होते हैं इसलिए इसे विकारी कृत प्रत्यय कहते हैं ।

विकारी कृत प्रत्यय के भेद :-

1. क्रियार्थक संज्ञा

2. कृतवाचक संज्ञा

3. वर्तमान कालिक कृदंत

4. भूतकालिक कृदंत

1. क्रियार्थक संज्ञा क्या होती है :-

वह संज्ञा जो क्रिया के मूल रूप में होती है और क्रिया का अर्थ देती है अथार्त को का अर्थ बताने वाला वह शब्द जो क्रिया के रूप में उपस्थित होते हुए भी संज्ञा का अर्थ देता है वह क्रियाथक संज्ञा कहलाती है ।

2. कृतवाचक संज्ञा क्या होती है :-

वे प्रत्यय जिनके जुड़ने पर कार्य करने वाले का बोध हो उसे कर्तृवाचक संज्ञा कहते हैं ।

3. वर्तमान कालिक कृदंत क्या होती है :-

जब हम एक काम को करते हुए दूसरे काम को साथ में करते हैं तो पहले वाली की गई क्रिया को वर्तमान कालिक कृदंत कहते हैं ।

4. भूतकालिक कृदंत क्या होता है :-

जब सामान्य भूतकालिक क्रिया को हुआ , हुए , हुई आदि को जोड़ने से भूतकालिक कृदंत बनता है ।

2. अविकारी कृत प्रत्यय क्या होता है :-

ऐसे कृत प्रत्यय जिनकी वजह से क्रियामूलक विशेषण और अव्यय बनते है उन्हें अविकारी कृत प्रत्यय कहते हैं ।

2. तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

जब संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण के अंत में प्रत्यय लगते हैं उन शब्दों को तद्धित प्रत्यय कहते हैं तद्धित प्रत्यय से मिलाकर जो शब्द बनते हैं उन्हें तद्धितांत प्रत्यय कहते हैं ।

जैसे :- सेठ+आनी = सेठानी ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) पछताना, जगना , पंडित , चतुर , ठाकुर + आइ = पछताई ,जगाई ,पण्डिताई ,चतुराई , ठकुराई आदि ।

(ii) पण्डित, ठाकुर + आइन = पण्डिताइन, ठकुराइन आदि ।

(iii) पण्डित, ठाकुर, लड़, चतुर, चौड़ा ,अच्छा + आई = पण्डिताई, ठकुराई, लड़ाई, चतुराई, चौड़ाई , अच्छाई आदि ।

(iv) सेठ, नौकर + आनी = सेठ, नौकर आदि ।

(v) बहुत, पंच, अपना +आयत = बहुतायत, पंचायत, अपनायत आदि ।

(vi) लोहा, सोना, दूध, गाँव + आर \आरा = लोहार, सुनार, दूधार, गँवार आदि ।

(vii) चिकना, घबरा, चिल्ल, कड़वा + आहट = चिकनाहट, घबराहट, चिल्लाहट, कड़वाहट आदि ।

(viii) फेन, कूट, तन्द्र, जटा, पंक, स्वप्न, धूम + इल = फेनिल, कुटिल, तन्द्रिल, जटिल, पंकिल, स्वप्निल, धूमिल आदि ।

(ix) कन्, वर्, गुरु, बल + इष्ठ = कनिष्ठ, वरिष्ठ, गरिष्ठ, बलिष्ठ आदि ।

(x) सुन्दर, बोल, पक्ष, खेत, ढोलक, तेल, देहात + ई = सुन्दर, बोल, पक्ष, खेत, ढोलक, तेल, देहात आदि ।

(xi) ग्राम, कुल + ईन = ग्रामीण, कुलीन आदि ।

(xii)भवत्, भारत, पाणिनी, राष्ट्र + ईय = भवदीय, भारतीय, पाणिनीय, राष्ट्रीय आदि ।

(xiii) बच्चा, लेखा, लड़का + ए = बच्चे, लेखे, लड़के आदि ।

(xiv) अतिथि, अत्रि, कुंती, पुरुष, राधा + एय = आतिथेय, आत्रेय, कौंतेय, पौरुषेय, राधेय आदि ।

(xv) फुल, नाक +एल = फुलेल, नकेल आदि ।

(xvi) डाका, लाठी + ऐत = डकैत, लठैत आदि ।

(xvii) अंध, साँप, बहुत, मामा, काँसा, लुट, सेवा + एरा/ऐरा = अँधेरा, सँपेरा, बहुतेरा, ममेरा, कसेरा, लुटेरा , सवेरा आदि ।

(xviii) खाट, पाट, साँप + ओला = खटोला, पटोला, सँपोला आदि ।

(xix) बाप, ठाकुर, मान + औती = बपौती, ठकरौती, मनौती आदि ।

(xx) बिल्ला, काजर + औटा = बिलौटा, कजरौटा आदि ।

(xxi) धम, चम, बैठ, बाल, दर्श, ढोल , लल + क = धमक, चमक, बैठक, बालक, दर्शक, ढोलक , ललक आदि ।

(xxii) विशेष, ख़ास + कर = विशेषकर, ख़ासकर आदि ।

(xxiii) खट, झट + का = खटका, झटका आदि ।

(xxiv) भ्राता, दो + जा = भतीजा, दूजा आदि ।

(xxv) चाम, बाछा, पंख, टाँग + डा/डी = चमड़ा, बछड़ा, पंखड़ी, टँगड़ी आदि ।

(xxvi) रंग, संग, खप + त = रंगत, संगत, खपत आदि ।

(xxvii) अद्य + तन = अद्यतन आदि ।

(xxviii) गुरु, श्रेष्ठ + तर = गुरुतर, श्रेष्ठतर आदि ।

(xxix) अंश, स्व , आ +त: = अंशतः, स्वतः , अत: आदि ।

(xxx) कम, बढ़, चढ़ + ती = कमती, बढ़ती, चढ़ती आदि ।

(xxxi) ऐ , कै , वै + सा = ऐसा , कैसा , वैसा आदि ।

(xxxii) लेश , रंच + मात्र = लेशमात्र , रंचमात्र आदि ।

तद्धित प्रत्यय के प्रकार :-

1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय

2. भाववाचक तद्धित प्रत्यय

3. ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय

4. संबंध वाचक तद्धित प्रत्यय

5. अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय

6. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय

7. स्थानवाचक तद्धित प्रत्यय

8. अव्ययवाचक तद्धित प्रत्यय

9. सादृश्यवाचक तद्धित प्रत्यय

10. गणनावाचक तद्धति प्रत्यय

11. स्त्रीबोधक तद्धित प्रत्यय

12. तारतम्यवाचक तद्धित प्रत्यय

13. पूर्णतावाचक तद्धित प्रत्यय

1. कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्यय को जोड़ने से कार्य को करने वाले का बोध हो उसे कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं अथार्त जो प्रत्यय संज्ञा , सर्वनाम तथा विशेषण के साथ मिलकर करने वाले का या कर्तृवाचक शब्द को बनाते हैं उसे कर्तृवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) सोना , लोहा , कह , चम + आर = सुनार , लुहार , कहार , चमार आदि ।

(ii) जुआ + आरी = जुआरी आदि ।

(iii) मजाक , रस , दुःख , आढत , मुख , रसोई + इया = मजाकिया , रसिया , दुखिया , आढतिया , मुखिया , रसोईया आदि ।

(iv) सब्जी , टोपी , घर , गाड़ी , पान + वाला = सब्जीवाला , टोपीवाला , घरवाला , गाड़ीवाला ,पानीवाला आदि ।

(v) पालन + हार = पालनहार आदि ।

(vi) समझ , ईमान , दुकान , कर्ज + दार = समझदार , ईमानदार , दुकानदार , कर्जदार आदि ।

(vii) तेल , भेद , रोग + ई = तेली , भेदी , रोगी आदि ।

(viii) घास , कसा , ठठ , लुट + एरा = घसेरा , कसेरा , ठठेरा , लुटेरा आदि ।

(ix) लकड , पानी , मनि + हारा = लकडहारा , पनिहारा , मनिहारा आदि ।

(x) पाठ , लेख , लिपि + क = पाठक , लेखक , लिपिक आदि ।

(xi) पत्र , कला , चित्र + कार = पत्रकार , कलाकार , चित्रकार आदि ।

(xii) मछु , गेरू , ठलु + आ = मछुआ , गेरुआ , ठलुआ आदि ।

(xiii) मशाल , खजान , मो + ची = मशालची , खजानची , मोची आदि ।

(xiv) कारी , बाजी , जादू + कारीगर , बाजीगर , जादूगर आदि ।

2. भाववाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

इस प्रत्यय में भाव प्रकट होता है ।इसमें प्रत्यय लगने की वजह से कहीं कहीं पर आदि स्वर की वृद्धि हो जाया करती है । जो प्रत्यय संज्ञा तथा विशेषण के साथ जुडकर भाववाचक संज्ञा को बनाते हैं उसे भाववाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) देवता ,मनुष्य , पशु , महा , गुरु , लघु + त्व = देवत्व , मनुष्यत्व , पशुत्व , महत्व , गुरुत्व , लघुत्व आदि ।

(ii) बच्चा , लडक , छुट , काला + पन = बचपन , लडकपन , छुटपन , कालापन आदि ।

(iii) सज्जा +वट = सजावट आदि ।

(iv) चिकना + हट = चिकनाहट आदि ।

(v) रंग + त = रंगत आदि ।

(vi) मीठा + आस = मिठास आदि ।

(vii) बुलाव , सराफ , चूर + आ = बुलावा , सराफा , चूरा आदि ।

(viii) भला , बुरा , कठिन , चतुर , ऊँचा + आई = भलाई , बुराई , कठिनाई , चतुराई , ऊँचाई आदि ।

(ix) बुढा , मोटा + आपा = बुढ़ापा , मोटापा आदि ।

(x) खट , मीठा , भडा + आस = खटास , मिठास , भडास आदि ।

(xi) कडवा , घबरा , झल्ला , चिकना + आहट = कडवाहट , घबराहट , झल्लाहट , चिकनाहट आदि ।

(xii) लाली , महा , अरुण , गरी + इमा = लालिमा , महिमा , अरुणिमा , गरिमा आदि ।

(xiii) गर्म , खेत , सर्द , गरीब + ई = गर्मी , खेती , सर्दी , गरीबी आदि ।

(xiv) सुंदर , मूर्ख , मनुष्य , लघु , गुरु , सम , कवि , एक , बन्धु + ता = सुन्दरता , मूर्खता , मनुष्यता , लघुता , गुरुता , समता , कविता , एकता , बन्धुता आदि ।

(xv) बाप , मान + औती =बपौती , मनौती आदि ।

(xvi) लाघ , गौर , पाट + अव = लाघव , गौरव , पाटव आदि ।

(xvii) पंडित , धैर , चतुर , मधु + य = पांडित्य , धैर्य , चातुर्य , माधुर्य आदि ।

(xviii) चौड़ा +आन = चौडान आदि ।

(xix) अपना + आयत = अपनायत आदि ।

(xx) छूट + आरा = छुटकारा आदि ।

3. ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्यय शब्दों से लघुता , प्रियता , हीनता का पता चलता हो उसे ऊनवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) ढोल + क = ढोलक आदि ।

(ii) छाता + री = छतरी आदि ।

(iii) बूढी , लोटा , डिबा , खाट + इया = बुढिया , लुटिया , डिबिया , खटिया आदि ।

(iv) टोप , कोठर , टोकन , ढोलक , मण्डल , टोकरा , पहाड़ , घन + ई =टोपी , कोठरी , टोकनी , ढोलकी , मण्डली , टोकरी , पहाड़ी , घण्टी आदि ।

(v) छोटा , कन + की = छोटकी , कनकी आदि ।

(vi) चोरी , कालू + टा = चोट्टा , कलूटा आदि ।

(vii) दुःख , बछ + डा = दुखड़ा , बछड़ा आदि ।

(viii) पाग , टूक , टांग + डी = पगड़ी , टुकड़ी , टंगड़ी आदि ।

(ix) खाट + ली = खटोली आदि ।

(x) बच्चा + वा = बचवा आदि ।

(xi) लँगोट , कचौट , बहु + टी = लंगोटी , कछौटी , बहूटी आदि ।

(xii) खाट , साँप + ओला = खटोला , संपोला आदि ।

(xiii) ठाकुर +आ = ठकुरा आदि ।

(xiv) टीका + ली = टिकली आदि ।

(xv) मरा + सा = मरासा आदि ।

4. संबंधवाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के लगने से संबंध का पता लगता है उसे संबंध वाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं इसमें कभी कभी आदि स्वर की वृद्धि हो जाती है ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) नाना + हाल = ननिहाल आदि ।

(ii) नाक + एल = नकेल आदि ।

(iii) ससुर + आल = ससुराल आदि ।

(iv) बाप + औती = बपौती आदि ।

(v) लखनऊ , पंजाब , गुजरात , बंगाल , सिंधु + ई = लखनवी , पंजाबी , गुजराती , बंगाली , सिंधी आदि ।

(vi) फूफा , मामा , चाचा + ऐरा = फुफेरा , ममेरा , चचेरा आदि ।

(vii) भाई , बहन + जा = भतीजा , भानजा आदि ।

(viii) पटना , कलकता , जबलपुर , अमृतसर + इया = पटनिया , कलकतिया , जबलपुरिया , अमृतसरिया आदि ।

(ix) शरीर , नीति , धर्म , अर्थ , लोक , वर्ष , एतिहास + इक = शारीरिक , नैतिक , धार्मिक , आर्थिक , लौकिक , वार्षिक , ऐतिहासिक आदि ।

(x) दया , श्रद्धा + आलु = दयालु , श्रद्धालु आदि ।

(xi) फल , पीड़ा , प्रचल , दुःख , मोह + इत = फलित , पीड़ित , प्रचलित , दुखित , मोहित आदि ।

(xii) रस , रंग , जहर + ईला = रसीला , रंगीला , जहरीला आदि ।

(xiii) भारत , प्रान्त , नाटक , भवद + ईय = भारतीय , प्रांतीय , नाटकीय , भवदीय आदि ।

(xiv) विष + ऐला = विषैला आदि ।

(xv) कठिन + तर = कठिनतर आदि ।

(xvi) बुद्धि + मान = बुद्धिमान आदि ।

(xvii) पुत्र , मातृ + वत = पुत्रवत , मातृवत आदि ।

(xviii) इक + हरा = इकहरा आदि ।

(xix) नन्द + ओई = ननदोई आदि ।

(xx) ग्राम , काम , हास् , भव + य = ग्राम्य , काम्य , हास्य , भव्य आदि ।

(xxi) जट , फेन , बोझ , पंक + इल = जटिल , फेनिल , बोझिल , पंकिल आदि ।

(xxii) स्वर्ण , अंत , रक्ति + इम = स्वर्णिम , अंतिम , रक्तिम आदि ।

5. अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के जुड़ने से शब्द के आंतरिक रूप में परिवर्तन हो जाता है और शब्द का अर्थ अपत्य हो जाता है । इनसे संतान या वंश में पैदा हुए व्यक्ति का बोध होता है उसे अपत्यवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं ।इस प्रत्यय में कभी कभी आदि स्वर की वृद्धि हो जाती है ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार से हैं :-

(i) वसुदेव , मनु , कुरु , रघु , यदु , विष्णु , कुन्ती + अ = वासुदेव , मानव , कौरव , राघव , यादव , वैष्णव , कौन्तेय आदि ।

(ii) नर + आयन = नारायण आदि ।

(iii) राधा , गंगा , भागिन + एय = राधेय , गांगेय , भागिनेय आदि ।

(iv) दिति , आदित + य = दैत्य , आदित्य आदि ।

(v) दशरथ , वाल्मिक , सौमित्र , जनक , द्रोपद , गांधार + ई = दाशरथि , वाल्मिकी , सौमित्री , जानकी , द्रोपदी , गांधारी आदि ।

6. गुणवाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के प्रयोग से पदार्थ के गुणों का बोध होता है उसे गुणवाचक प्रत्यय कहते हैं । इस प्रत्यय से संज्ञा शब्द गुन्वाची हो जाता है ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) भूख , प्यास , ठंड , मीठ + आ = भूखा , प्यासा , ठंडा , मीठा आदि ।

(ii) निशा + अ = नैश आदि ।

(iii) शरीर , नगर , इतिहास + इक = शारीरिक , नागरिक , ऐतिहासिक आदि ।

(iv) पक्ष , धन , लोभ , क्रोध , गुण , विद्याथ , सुख , ज्ञान , जंगल + ई = पक्षी , धनी , लोभी , क्रोधी , गुणी , विद्यार्थी , सुखी , ज्ञानी , जंगली आदि ।

(v) बुद्ध + ऊ = बुद्धू आदि ।

(vi) छूत + हा = छुतहर आदि ।

(vii) गांजा + एडी = गंजेड़ी आदि ।

(viii) शाप , पुष्प , आनन्द , क्रोध + इत = शापित , पुष्पित , आनन्दित , क्रोधित आदि ।

(ix) लाल + इमा = लालिमा आदि ।

(x) वर + इष्ठ = वरिष्ठ आदि ।

(xi) कुल + ईन = कुलीन आदि ।

(xii) मधु + र = मधुर आदि ।

(xiii) वत्स + ल = वत्सल आदि ।

(xiv) माया + वी = मायावी आदि ।

(xv) कर्क + श = कर्कश आदि ।

(xvi) चमक , भडक , रंग , सज + ईला = चमकीला , भडकीला , रंगीला , सजीला आदि ।

(xvii) वांछन , अनुकरण , भारत , रमण + ईय = वांछनीय , अनुकरणीय , भारतीय , रमणीय आदि ।

(xviii) कृपा , दया , शंका + लू = कृपालु , दयालु , शंकालु आदि ।

(xix) विष , कस + ऐला = विषैला , कसैला आदि ।

(xx) दया , कुल + वंत = दयावन्त , कुलवंत आदि ।

(xxi) गुण , रूप , बल , विद + वान = गुणवान , रूपवान , बलवान , विद्वान् आदि ।

(xxii) बुद्धि , शक्ति , गति , आयुष + मान = बुद्धिमान , शक्तिमान , गतिमान , आयुष्मान आदि ।

(xxiii) पश्चात् , पौर्वा , दक्षिण + त्य = पश्चात्य , पौर्वात्य , दक्षिणात्य आदि ।

(xxiv) सुन + हरा = सुनहरा आदि ।

(xxv) रूप + हला = रुपहला आदि ।

7. स्थान वाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के प्रयोग से स्थान का पता चलता है वहाँ पर स्थान वाचक तद्धित प्रत्यय होता है । शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) गुजरात , पंजाब , बंगाल , जर्मन + ई = गुजरती , पंजाबी , बंगाली , जर्मनी आदि ।

(ii) पटना , मुम्बई , नागपुर , जयपुर + इया = पटनिया , मुम्बईया , नागपुरिया , जयपुरिया आदि ।

(iii) चारा + गाह = चारागाह आदि ।

(iv) आगा + आड़ी = अगाड़ी आदि ।

(v) सर्व , यद , तद + त्र = सर्वत्र , यत्र , तत्र आदि ।

(vi) डेरे , दिल्ली , बनारस , सुरत , चाय + वाला = डेरेवाला , दिल्लीवाला , बनारसवाला , सुरतवाला , चायवाला आदि ।

(vii) कलक , तिरहु + तिया = कलकतिया , तिरहुतिया आदि ।

8. अव्ययवाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

संज्ञा , सर्वनाम और विशेषण आदि पदों के अंत में आँ, अ ओं , तना , भर आदि बहुत से प्रत्यय जोडकर अव्यय वाचक तद्धित प्रत्यय बनाए जाते हैं ।

पद + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) सर्व + दा = सर्वदा आदि ।

(ii) एक + त्र = एकत्र आदि ।

(iii) कोस + ओं = कोसों आदि ।

(iv) आप + स = आपस आदि ।

(v) यह + आँ = यहाँ आदि ।

(vi) दिन + भर = दिनभर आदि ।

(vii) धीर + ए = धीरे आदि ।

(viii) तड़का + ए = तडके आदि ।

(ix) पीछा + ए = पीछे आदि ।

9. सादृश्यवाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों को जोड़ने से बने हुए शब्दों से समानता का पता चले उन्हें सादृश्यवाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) सुन , रूप + हरा = सुनहरा , रूपहरा आदि ।

(ii) पीला , नीला , काला + सा = पीला सा , नीला सा , काला सा आदि ।

10. गणना वाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों को जोड़ने से शब्दों में संख्या का पता चले उसे गणना वाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) पह + ला = पहला आदि ।

(ii) दुस , तीन + रा = दूसरा , तीसरा आदि ।

(iii) इक , दु , ति + हरा = इकहरा , दुहरा , तिहरा आदि ।

(iv) पांच , सात , दस + वाँ = पांचवां , सातवाँ , दसवां आदि ।

(v) चौ +था = चौथा आदि ।

(vi) दो +गुना = दोगुना आदि ।

11. स्त्रीवाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :–

जिन प्रत्यय की वजह से संज्ञा , सर्वनाम और विशेषण के साथ लगकर उनके स्त्रीलिंग होने का भेद उत्पन्न हो उन्हें स्त्रीबोधक तद्धित प्रत्यय कहते हैं अथार्त जिन प्रत्ययों को लगाने से स्त्री जाति का बोध हो उसे स्त्रीबोधक तद्धित प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) देवा , जेठ , नौकर + आनी = देवरानी , जेठानी , नौकरानी आदि ।

(ii) रूद्र , इंद्र + आणी = रुद्राणी , इन्द्राणी आदि ।

(iii) देव , लड़का + ई = देवी , लडकी आदि ।

(iv) सुत , प्रिय ,छात्र , अनुज + आ =सुता , प्रिया , छात्रा , अनुजा आदि ।

(v) धोबी , बाघ , माली + इन = धोबिन , बाघिन , मालिन आदि ।

(vi) ठाकुर , मुंशी + आइन = ठकुराइन , मुंशियाइन आदि ।

(vii) शेर , मोर + नी = शेरनी , मोरनी आदि ।

12. तारतम्यवाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

दो या ज्यादा वस्तुओं में श्रेष्ठता बताने के लिए तारतम्य वाचक तद्धित प्रत्यय प्रयोग किया जाता है ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) अधिक , गुरु , लघु + तर = अधिकतर , गुरुतर , लघुतर आदि ।

(ii) सुंदर , अधिक , लघु + तम = सुन्दरतम , अधिकतम , लघुतम आदि ।

(iii) गर , वर + ईय = गरिय , वरीय आदि ।

(iv) गर , वर , कन + इष्ठ = गरिष्ठ , वरिष्ठ , कनिष्ठ आदि ।

13. पूर्णतावाचक तद्धित प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों को लगाने से शब्द में संख्या की पूर्णता का बोध होता है उसे ही पूर्णता वाचक तद्धित प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) प्रथ , पंच , सप्त , नव , दश + म = प्रथम , पंचम , सप्तम , नवम , दशम आदि ।

(ii) चतुर +थ = चतुर्थ आदि ।

(iii) पष + ठ = पष्ठ आदि ।

(iv) द्वि , तृ + तीय = द्वितीय , तृतीय आदि ।

(ख) हिंदी के प्रत्यय क्या होते हैं :-

हिंदी के प्रत्ययों को भी संस्कृत के प्रत्ययों की तरह ही जोड़ा जाता है लेकिन इन दोनों में इतना अंतर होता है की संस्कृत में कृत और तद्धित प्रत्यय होते हैं लेकिन हिंदी में तद्भव और देशज प्रत्यय होते हैं । हिंदी के भी अनेक प्रत्ययों को प्रयोग किया जाता है ।इतिहास के अनुसार हिंदी के प्रत्ययों को चार भागों में बांटा गया है ।

हिंदी के भाग :-

1. तत्सम प्रत्यय

2. तद्भव प्रत्यय

3. देशज प्रत्यय

4. विदेशज प्रत्यय

1. तत्सम प्रत्यय :-

प्रत्यय = अर्थ = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) आ – ( स्त्री प्रत्यय , भाववाचक प्रत्यय ) – आदरनीया , प्रिया , माननीया , सुता , इच्छा , पूजा आदि ।

(ii) आनी – ( स्त्री प्रत्यय ) – देवरानी , सेठानी , नौकरानी , भवानी , मेहतरानी आदि ।

(iii) आलु – ( विशेषण प्रत्यय , वाला ) – कृपालु , दयालु , निद्रालु , श्रद्धालु आदि ।

(iv) इत – ( विशेषण प्रत्यय , युक्त ) – पल्लवित , पुष्पित , फलित , हर्षित , निर्मित आदि ।

(v) इमा – ( भाववाचक प्रत्यय ) – गरिमा , मधुरिमा , लालिमा , महिमा , नीलिमा आदि ।

(vi) इक – ( विशेषण प्रत्यय , संज्ञा प्रत्यय ) – दैनिक , वैज्ञानिक , वैदिक , लौकिक , भौतिक आदि ।

(vii) क – (स्वार्थ , समूह ) – घटक , ठंडक , भटक , शतक , सप्तक आदि ।

(viii) कार – (लिखने वाला , बनाने वाला , वाला ) – पत्रकार , जानकार शिल्पकार आदि ।

(ix) ज – ( जन्मा हुआ ) – अंडज , पिंडज , जलज , पंकज , देशज , विदेशज आदि ।

(x) जीवी – ( जीनेवाला ) – परजीवी , बुद्धजीवी , लघुजीवी , दीर्घजीवी आदि ।

(xi) ज्ञ – ( जाननेवाला ) – अज्ञ , निर्वज्ञ , सर्वज्ञ , विज्ञ , मर्मज्ञ आदि ।

(xii) त: – ( क्रिया विशेषण प्रत्यय ) – लघुतया , विशेषतया , मुख्यतया , सामान्यतया आदि ।

(xiii) तर – ( तुलना बोधक प्रत्यय ) – उच्चतर , अधिकतर , निम्नतर , सुन्द्रतर , श्रेष्ठतर आदि ।

(xiv) तम – ( सर्वधिकता बोधक प्रत्यय ) – उच्चतम , लघुतम , अधिकतम , महत्तम , निकृष्टतम आदि ।

(xv) ता – ( भाववाचक संज्ञा प्रत्यय ) – सुन्दरता , नवीनता , मधुरता , अधिकता आदि ।

(xvi) त्व – ( भाववाचक संज्ञा प्रत्यय ) – कृतित्व , ममत्व , महत्व , सतीत्व , जनित्व , आदि ।

(xvii) मान – ( विशेषण वाचक प्रत्यय ) – स्वाभिमान , मेहमान , निर्मान आदि ।

(xviii) वान – ( वाला ) – गुणवान , धनवान , बलवान , रूपवान आदि ।

2. तद्भव प्रत्यय :-

प्रत्यय = अर्थ = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) अंगड – ( वाला ) – बतंगड , कटंगड आदि ।

(ii) अंतू – ( वाला ) – रटंतू , घुमंतू , जीवंतू आदि ।

(iii) अत – ( संज्ञा प्रत्यय ) – खपत , लिखत , रंगत ,चढत , पढ्त आदि ।

(iv) आँध – ( संज्ञा प्रत्यय ) – विषांध , सरांध आदि ।

(v) आ – ( भाववाचक प्रत्यय ) – जोड़ा , फोड़ा , रगडा , झगड़ा , तगड़ा आदि ।

(vi) आई – ( भाववाचक प्रत्यय ) – कठिनाई , बुराई , सफाई , लिखाई , छपाई , जमाई आदि ।

(vii) आऊ – ( वाला ) – खाऊ , टिकाऊ , बिकाऊ , पण्डिताऊ , जडाऊ आदि ।

(viii) आप /आपा – ( भाववाचक प्रत्यय ) – मिलाप , अपनापा , पुजापा , बुढ़ापा आदि ।

(ix) आर – ( करनेवाला ) – कुम्हार , लुहार , चम्हार , त्यौहार आदि ।

(x) आरा – ( करनेवाला ) – घसियारा , हथियारा आदि ।

(xi) आरी – ( करनेवाला ) – पुजारी , भिखारी , जुआरी आदि ।

(xii) आलू – ( करनेवाला ) – कृपालु , झगड़ालू , दयालु आदि ।

(xiii) आवट – ( भाववाचक प्रत्यय ) – लिखावट , सजावट , बनावट , कसावट , बिनावट आदि ।

(xiv) आस – ( इच्छावाचक प्रत्यय ) – छपास , लिखास , निकास , प्यास , खास आसी ।

(xv) आहत – ( भाववाचक प्रत्यय ) – भलमनसाहत आदि ।

(xvi) आहट – ( भाववाचक प्रत्यय ) – गडगडाहट , घबराहट , चिल्लाहट आदि ।

(xvii) इन – ( स्त्री प्रत्यय ) – जुलाहिन , ठकुराइन , तेलिन , पुजारिन , सेठाइन आदि ।

(xviii) इया – ( वाला , लघुत्व , बोधक , स्त्री प्रत्यय ) – चुटिया , घटिया , चुहिया , डिबिया , भोजपुरिया , जयपुरिया , नागपुरिया , कनौजिया आदि ।

(xix) इला – ( वाला ) – चमकीला , भडकीला , पथरीला , शर्मिला , उर्मिला आदि ।

(xx) एरा – ( वाला ) – चचेरा , ममेरा , बहुतेरा , फुफेरा आदि ।

(xxi) औडा / औडी – ( लिंगवाचक प्रत्यय ) – सेवड़ा , रेवड़ी , पकौड़ा आदि ।

(xxii) त – ( भाववाचक प्रत्यय ) – चाहत , मिल्लत , मोहित , लिखित आदि ।

(xxiii) ता – ( कर्मवाचक प्रत्यय ) – आता , सोता , खाता , पिता , पीता , जगता , जाता आदि ।

(xxiv) पन – ( भाववाचक प्रत्यय ) – बचपन , पागलपन , बड़प्पन , लडकपन , छुटपन आदि ।

(xxv) वाला – ( कृतवाचक प्रत्यय , विशेषण प्रत्यय ) – अपनेवाला , ऊपरवाला , खानेवाला, जानेवाला , लालवाला , लिखनेवाला , छापनेवाला आदि ।

3. देशज प्रत्यय :-

प्रत्यय = अर्थ = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) अक्कड़ – ( वाला ) – घुमक्कड़ ,पियक्कड़ , भुलक्कड़ आदि ।

(ii) अड़ – ( स्वार्थिक ) – अंधड़ , भुक्खड़ आदि ।

(iii) आक – ( भाववाचक प्रत्यय ) – खर्राटा , फर्राटा , सर्राटा आदि ।

(iv) इयल – ( वाला ) – अडियल , दढ़ियल , सडियल आदि ।

4. विदेशज प्रत्यय :- विदेशज प्रत्यय को दो भागों में बाँटा जाता है ।

विदेशज के भाग :-

1. अरबी फारसी प्रत्यय

2. अंगेजी प्रत्यय

1. अरबी फारसी प्रत्यय :-

प्रत्यय = अर्थ = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) आ -( भाववाचक प्रत्यय ) – सफेदा , खराबा आदि ।

(ii) आना – ( भाववाचक , विशेषण वाचक प्रत्यय ) – जुर्माना , दस्ताना , मर्दाना ,मस्ताना , दस्ताना आदि ।

(iii) आनी – ( संबंधवाचक प्रत्यय ) – जिस्मानी , मर्दानी , बर्फानी , रूहानी आदि ।

(iv) कार – ( करनेवाला ) – काश्तकार , शिल्पकार , दस्तकार , पेशकार , सलाहकार आदि ।

(v) खोर – ( खाने वाला ) – गमखोर , घूसखोर , रिश्वतखोर , हरामखोर आदि ।

(vi) गार – ( करनेवाला ) – परहेजगार , मददगार , यादगार , रोजगार , बेरोजगार आदि ।

(vii) गी – ( भाववाचक संज्ञा प्रत्यय ) – जिन्दगी , गंदगी , बन्दगी आदि ।

(viii) चा – ( वाला ) – देगचा , बगीचा आदि ।

(ix) ची – ( वाला ) – बगीची , इलायची , डोलची , संदुकची आदि ।

(x) दान – ( स्थिति वाचक ) – इत्रदान , कलमदान , पीकदान आदि ।

(xi) दार – ( वाला ) – ईमानदार , कर्जदार दुकानदार , मालदार आदि ।

(xii) नाक – ( वाला ) – खतरनाक , खौफनाक , दर्दनाक ,शर्मनाक आदि ।

(xiii) बान – ( वाला ) – दरबान , बागबान , मेजबान आदि ।

(xiv) मंद – (वाला ) – अक्लमंद , जरुरतमन्द आदि ।

2. अंग्रेजी प्रत्यय :-

(i) इज्म – ( वाद , मत ) – कम्युनिज्म , बुद्धिज्म , सोशिलिज्म आदि ।

(ii) इस्ट – ( वादी , व्यक्ति ) – कम्युनिष्ट , बुद्धिस्ट , सोशलिष्ट आदि ।

हिंदी के वर्ग :-

1. कर्त्तृवाचक प्रत्यय

2. भाववाचक प्रत्यय

3. संबंध वाचक प्रत्यय

4. लघुतावाचक प्रत्यय

5. गणना वाचक प्रत्यय

6. सादृश्यवाचक प्रत्यय

7. गुणवाचक प्रत्यय

8. स्थान वाचक प्रत्यय

1. कर्त्तृवाचक प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के प्रयोग से कार्य करने वाले का पता चले उसे कर्त्तृवाचक प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) सोना , लोहा , चम , कुम्ह + आर = सुनार , लोहार , चमार , कुम्हार आदि ।

(ii) चट ,खद , नद + ओरा = चटोरा , खदोरा , नदोरा आदि ।

(iii) दुःख , सुख , रस + इया = दुखिया , सुखिया , रसिया आदि ।

(iv) मर , सड , दढ़+ इयल = मरियल , सडियल , दढ़ियल आदि ।

(v) साँप , लुट , कस , लखे + एरा = सपेरा, लुटेरा, कसेरा, लखेरा आदि ।

(vi) घर , तांगा , झाड़ू , मोटर , रख , लिखना + वाला = घरवाला, ताँगेवाला, झाड़ूवाला, मोटरवाला , रखवाला , लिखनेवाला आदि ।

(vii) गा , रख , खी + वैया = गवैया, नचैया, रखवैया, खिवैया आदि ।

(viii) लकड़ी , पानी + हारा = लकड़हारा, पनिहारा आदि ।

(ix) राख , चाख + हार = राखनहार, चाखनहार आदि ।

(x) भूल , घूम , पिय + अक्कड़ = भुलक्कड़, घुमक्कड़, पियक्कड़ आदि ।

(xi) लड़ + आकू = लड़ाकू आदि ।

(xii) खेल + आड़ी = खिलाडी आदि ।

(xiii) भाग +ओडा = भगोड़ा आदि ।

2. भाववाचक प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के प्रयोग से भाव का पता चलता है उसे भाववाचक प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) प्यास , सुख , रुख , लेख , भूख + आ = प्यासा , सूखा , रुखा , लेखा , भूखा आदि ।

(ii) मीठा , रंग , सिल , भला + आई = मिठाई, रंगाई, सिलाई, भलाई आदि ।

(iii) धम , धड , भड + आका = धमाका, धड़ाका, भड़ाका आदि ।

(iv) मोटा , बुढा , रंड + आपा = मुटापा, बुढ़ापा, रण्डापा आदि ।

(v) चिकना , कडवा , घबडा , गरमा , घबरा + आहट = चिकनाहट, कड़वाहट, घबड़ाहट, गरमाहट , घबराहट आदि ।

(vi) मीठा , खट , भड + आस = मिठास, खटास, भड़ास आदि ।

3. संबंध वाचक प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के प्रयोग से संबंध का पता चलता है उसे संबंध वाचक प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) बहन , नन्द , रस + ओई = बहनोई, ननदोई, रसोई आदि ।

(ii) खेल , पह , अन + आड़ी = खिलाड़ी, पहाड़ी, अनाड़ी आदि ।

(iii) चाचा , मामा , मौसा , फूफा + एरा = चचेरा, ममेरा, मौसेरा, फुफेरा आदि ।

(iv) लोहा , सोना , मनी + आरी = लुहारी, सुनारी, मनिहारी आदि ।

(v) नानी , ससुर + आल = ननिहाल, ससुराल आदि ।

4. लघुता वाचक प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के प्रयोग से लघुता या न्यूनता का बोध होता है उसे लघुता वाचक प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) रस्सा , कटोरा , टोकरा , ढोलक , लिखना + ई = रस्सी, कटोरी, टोकरी, ढोलकी , लिखाई आदि ।

(ii) टांग , टुक , पग , बछ + डी = टंगड़ी , टुकड़ी, पगड़ी, बछड़ी आदि ।

(iii) खाट , लोटा , चोटी , डीबी , पुड़ी + इया = खटिया, लुटिया, चुटिया, डिबिया, पुड़िया आदि ।

(iv) मुख , दुःख , चम + डा = मुखड़ा, दुखड़ा, चमड़ा आदि ।

(v) खाट , मध , साँप + ओला = खटोला, मझोला, सँपोला आदि ।

5. गणना वाचक प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के प्रयोग से गणना वाचक संख्या का पता चले उसे गणना वाचक प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) चौ + था = चौथा आदि ।

(ii)दुस , तिस + रा = दूसरा , तीसरा आदि ।

(iii) पह + ला = पहला आदि ।

(iv) पाँच , दस , सात , आठ + वाँ = पाँचवाँ , दसवाँ , सातवाँ , आठवाँ आदि ।

6. सादृश्यवाचक प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के प्रयोग से शब्दों के बीच समानता का पता चले उसे सादृश्यवाचक प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) मुझ , तुझ , नीला , चाँद , गुलाब , कमल + सा = मुझ–सा, तुझ–सा, नीला–सा, चाँद–सा, गुलाब–सा ,कमल सा आदि ।

(ii) दु , ति , चौ + हरा = दुहरा, तिहरा, चौहरा आदि ।

(iii) सुन , रूप + हला = सुनहला , रुपहला आदि ।

7. गुणवाचक प्रत्यय क्या होता है :–

जिन प्रत्ययों को प्रयोग करने से गुण का पता चले उसे गुणवाचक प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार है :-

(i) मीठ , ठंड , प्यास , भूख , प्यार + आ = मीठा, ठंडा, प्यासा, भूखा, प्यारा आदि ।

(ii) लच , गँठ , सज , रंग , चमक , रस + ईला = लचीला, गँठीला, सजीला, रंगीला, चमकीला, रसीला आदि ।

(iii) मटम , कष , विष + ऐला = मटमैला, कषैला, विषैला आदि ।

(iv) बट , पंडित , नामधार , खट + आऊ = बटाऊ, पंडिताऊ, नामधराऊ, खटाऊ आदि ।

(v) कला , कुल , दया + वन्त = कलावन्त, कुलवन्त, दयावन्त आदि ।

(vi) मूर्ख , लघु , कठोर , मृदु + ता = मूर्खता, लघुता, कठोरता, मृदुता आदि ।

8. स्थान वाचक प्रत्यय क्या होता है :-

जिन प्रत्ययों के प्रयोग से किसी स्थान का पता चले उसे स्थान वाचक प्रत्यय कहते हैं ।

शब्द + प्रत्यय = उदहारण इस प्रकार हैं :-

(i) पंजाब , गुजरात , मराठ , अजमेर , बीकानेर , बनारस , जयपुर + ई = पंजाबी, गुजराती, मराठी, अजमेरी, बीकानेरी, बनारसी, जयपुरी आदि ।

(ii) अमृतसर , भोजपुर , जयपुर , जमिलपुर + इया = अमृतसरिया, भोजपुरिया, जयपुरिया, जालिमपुरिया आदि । 

(iii) हरी , राजपूत , तेलंगा + आना = हरियाना, राजपूताना, तेलंगाना आदि । 

(iv) हरियाणा , देहल + वी = हरियाणवी, देहलवी आदि । 

हिंदी में प्रयुक्त होने वाले बहुत से उदहारण इस प्रकार हैं :-

1. अ – शैव, वैष्णव, तैल, पार्थिव, मानव, पाण्डव, वासुदेव, लूट, मार, तोल, लेख, पार्थ, दानव, यादव, भार्गव, माधव, जय, लाभ, विचार, चाल, लाघव, शाक्त, मेल, बौद्ध।

2. अक – चालक, पावक, पाठक, लेखक, पालक, विचारक, खटक, धावक, गायक, नायक, दायक।

3. अक्कड़ – भुलक्कड़, घुमक्कड़, पियक्कड़, कुदक्कड़, रुअक्कड़, फक्कड़, लक्कड़।

4. अंत – गढ़ंत, लड़ंत, भिड़ंत, रटंत, लिपटंत, कृदन्त, फलंत।

5. अन्तर – रुपान्तर, मतान्तर, मध्यान्तर, समानान्तर, देशांतर, भाषांतर।

6. अतीत – कालातीत, आशातीत, गुणातीत, स्मरणातीत।

7. अंदाज – तीरंदाज, गोलंदाज, बर्कंदाज, बेअंदाज।

8. अंध – सड़ांध, मदांध, धर्माँध, जन्मांध, दोषांध।

9. अधीन – कर्माधीन, स्वाधीन, पराधीन, देवाधीन, विचाराधीन, कृपाधीन, निर्णयाधीन, लेखकाधीन, प्रकाशकाधीन।

10. अन – लेखन, पठन, वादन, गायन, हवन, गमन, झाड़न, जूठन, ऐँठन, चुभन, मंथन, वंदन, मनन, चिँतन, ढ़क्कन, मरण, चलन, जीवन।

11. अना – भावना, कामना, प्रार्थना।

12. अनीय – तुलनीय, पठनीय, दर्शनीय।

13. अन्वित – क्रोधान्वित, दोषान्वित, लाभान्वित, भयान्वित, क्रियान्वित, गुणान्वित।

14. अन्वय – पदान्वय, खंडान्वय।

15. अयन – रामायण, नारायण, अन्वयन।

16. आ – प्यासा, लेखा, फेरा, जोड़ा, प्रिया, मेला, ठंडा, भूखा, छाता, छत्रा, हर्जा, खर्चा, पीड़ा, रक्षा, झगड़ा, सूखा, रुखा, अटका, भटका, मटका, भूला, बैठा, जागा, पढ़ा, भागा, नाचा, पूजा, मैला, प्यारा, घना, झूला, ठेला, घेरा, मीठा।

17. आइन – ठकुराइन, पंडिताइन, मुंशियाइन।

18. आई – लड़ाई, चढ़ाई, भिड़ाई, लिखाई, पिसाई, दिखाई, पंडिताई, भलाई, बुराई, अच्छाई, बुनाई, कढ़ाई, सिँचाई, पढ़ाई, उतराई।

19. आऊ – दिखाऊ, टिकाऊ, बटाऊ, पंडिताऊ, नामधराऊ, खटाऊ, चलाऊ, उपजाऊ, बिकाऊ, खाऊ, जलाऊ, कमाऊ, टरकाऊ, उठाऊ।

20. आक – लड़ाक, तैराक, चालाक, खटाक, सटाक, तड़ाक, चटाक।

21. आका – धमाका, धड़ाका, भड़ाका, लड़ाका, फटाका, चटाका, खटाका, तड़ाका, इलाका।

22. आकू – लड़ाकू, पढ़ाकू, उड़ाकू, चाकू।

23. आकुल – भयाकुल, व्याकुल।

24. आटा – सन्नाटा, खर्राटा, फर्राटा, घर्राटा, झपाटा, थर्राटा।

25. आड़ी – कबाड़ी, पहाड़ी, अनाड़ी, खिलाड़ी, अगाड़ी, पिछाड़ी।

26. आढ्य – धनाढ्य, गुणाढ्य।

27. आतुर – प्रेमातुर, रोगातुर, कामातुर, चिँतातुर, भयातुर।

28. आन – उड़ान, पठान, चढ़ान, नीचान, उठान, लदान, मिलान, थकान, मुस्कान।

29. आना – नजराना, हर्जाना, घराना, तेलंगाना, राजपूताना, मर्दाना, जुर्माना, मेहनताना, रोजाना, सालाना।

30. आनी – देवरानी, जेठानी, सेठानी, गुरुआनी, इंद्राणी, नौकरानी, रूहानी, मेहतरानी, पंडितानी।

31. आप – मिलाप, विलाप, जलाप, संताप।

32. आपा – बुढ़ापा, मुटापा, रण्डापा, बहिनापा, जलापा, पुजापा, अपनापा।

33. आब – गुलाब, शराब, शबाब, कबाब, नवाब, जवाब, जनाब, हिसाब, किताब।

34. आबाद – नाबाद, हैदराबाद, अहमदाबाद, इलाहाबाद, शाहजहाँनाबाद।

35. आमह – पितामह, मातामह।

36. आयत – त्रिगुणायत, पंचायत, बहुतायत, अपनायत, लोकायत, टीकायत, किफायत, रियायत।

37. आयन – दांड्यायन, कात्यायन, वात्स्यायन, सांस्कृत्यायन।

38. आर – कुम्हार, सुनार, लुहार, चमार, सुथार, कहार, गँवार, नश्वार।

39. आरा – बनजारा, निबटारा, छुटकारा, हत्यारा, घसियारा, भटियारा।

40. आरी – पुजारी, सुनारी, लुहारी, मनिहारी, कोठारी, बुहारी, भिखारी, जुआरी।

41. आरु – दुधारु, गँवारु, बाजारु।

42. आल – ससुराल, ननिहाल, घड़ियाल, कंगाल, बंगाल, टकसाल।

43. आला – शिवाला, पनाला, परनाला, दिवाला, उजाला, रसाला, मसाला।

44. आलु – ईर्ष्यालु, कृपालु, दयालु।

45. आलू – झगड़ालू, लजालू, रतालू, सियालू।

46. आव – घेराव, बहाव, लगाव, दुराव, छिपाव, सुझाव, जमाव, ठहराव, घुमाव, पड़ाव, बिलाव।

47. आवर – दिलावर, दस्तावर, बख्तावर, जोरावर, जिनावर।

48. आवट – लिखावट, थकावट, रुकावट, बनावट, तरावट, दिखावट, सजावट, घिसावट।

49. आवना – सुहावना, लुभावना, डरावना, भावना।

50. आवा – भुलावा, बुलावा, चढ़ावा, छलावा, पछतावा, दिखावा, बहकावा, पहनावा।

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