Posts

Showing posts from December, 2019

समरूपी भिन्नार्थक शब्द

समरूपी भिन्नार्थक शब्द समरूप भिन्नार्थक शब्द :- समरूप भिन्नार्थक शब्द चार शब्दों से मिलकर बने होते हैं – श्रुति+सम+भिन्न+अर्थ। जिसका अर्थ होता है समान लगने वाला परन्तु भिन्न। जो शब्द सुनने में एक जैसे लगते हैं पर उनके अर्थ अलग होते हैं उन्हें समरूप भिन्नार्थक शब्द कहते हैं। इन्हें समध्वनि , समत्रुत , समोच्चरित और श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द भी कहते हैं। पहला समरूप शब्द (अर्थ) = दूसरा समरूप शब्द (अर्थ) के उदहारण इस प्रकार हैं 1. अनल (आग) = अनिल (हवा, वायु) 2. ओर (तरफ) = और (तथा) 3. कुल (वंश) = कूल (किनारा) 4. पानी (जल) = पाणि (हाथ) 5. शर (बाण) = सर (तालाब) 6. कंगाल (गरीब) = कंकाल (ठठरी) 7. अवधि (समय) = अवधि (अवध की भाषा) 8. नीरद (बादल) = नीरज (कमल) 9. प्रमाण (सबूत) = प्रणाम (नमस्कार) 10. कोश (शब्द-भंडार) = कोष (खजाना) 11. अचार (आम, निम्बू का अचार) = आचार (आचरण) 12. अनु (पीछे) = अणु (कण) 13. अपेक्षा (उम्मीद, तुलना) = उपेक्षा (अनादर) 14. अभय (निडर) = उभय (दोनों) 15. कपट (धोखा) = कपाट (दरवाजा) 16. दिन (दिवस) = दीन (गरीब) 17. दिशा (तरफ) = दशा (हालत) 18. देव (देवता) = द...

वचन

वचन की परिभाषा,भेद और उदाहरण वचन की परिभाषा : वचन का शब्दिक अर्थ संख्यावचन होता है। संख्यावचन को ही वचन कहते हैं। वचन का एक अर्थ कहना भी होता है। संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति , वस्तु के एक से अधिक होने का या एक होने का पता चले उसे वचन कहते हैं। अथार्त संज्ञा के जिस रूप से संख्या का बोध हो उसे वचन कहते हैं अथार्त संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण और क्रिया के जिस रूप से हमें संख्या का पता चले उसे वचन कहते हैं। जैसे :- लडकी खेलती है। लडकियाँ खेलती हैं। वचन के भेद :- 1. एकवचन 2. बहुवचन 1. एकवचन क्या होता है :- जिस शब्द के कारण हमें किसी व्यक्ति , वस्तु , प्राणी , पदार्थ आदि के एक होने का पता चलता है उसे एकवचन कहते हैं। जैसे :- लड़का , लडकी , गाय , सिपाही , बच्चा , कपड़ा , माता , पिता , माला , पुस्तक , स्त्री , टोपी , बन्दर , मोर , बेटी , घोडा , नदी , कमरा , घड़ी , घर , पर्वत , मैं , वह , यह , रुपया , बकरी , गाड़ी , माली , अध्यापक , केला , चिड़िया , संतरा , गमला , तोता , चूहा आदि। 2. बहुवचन क्या होता है :- जिस विकारी शब्द या संज्ञा के कारण हमें किसी व्यक्ति , वस्तु , प्राणी , पदार्थ आ...

समुच्चयबोधक

समुच्चयबोधक की परिभाषा, भेद और उदाहरण समुच्चयबोधक क्या होता है :- जिन शब्दों की वजह से दो या दो से ज्यादा वाक्य , शब्द , या वाक्यांश जुड़ते हैं उन्हें समुच्चयबोधक कहा जाता है। जहाँ पर तब , और , वरना , किन्तु , परन्तु , इसीलिए , बल्कि , ताकि , क्योंकि , या , अथवा , एवं , तथा , अन्यथा आदि शब्द जुड़ते हैं वहाँ पर समुच्चयबोधक होता है। इन समुच्चयबोधक शब्दों को योजक भी कहा जाता है। कुछ शब्द जब भेद प्रकट करते हैं तब भी शब्दों और वाक्यांशों को जोड़ते हैं। इसे अव्यय का एक भाग माना जाता है इसी वजह से इसे समुच्चयबोधक अव्यय भी कहा जाता है। जैसे :- (i) राम ने खाना खाया और सो गया। (ii) उसने बहुत समझाया लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं मानी। (iii) अगर तुम बुलाते तो मैं जरुर आता। (iv) श्रुति और गुंजन पढ़ रहे हैं। (v) सीता ने बहुत मेहनत की फिर भी सफल नहीं हुई। (vi) मुझे टेपरिकार्डर या घड़ी चाहिए। (vii) राम और श्याम आपस में बातें कर रहे हैं। (viii) क्या हुआ वह धनवान है लेकिन कंजूस है। समुच्चय बोधक के भेद :- 1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक 2. व्यधिकरण समुच्चयबोधक 1. समानाधिकरण समुच्चयबोधक :- जो पद ...

संबंधबोधक

संबंधबोधक की परिभाषा, भेद और उदाहरण संबंधबोधक क्या होता है :- जिन शब्दों की वजह से संज्ञा और सर्वनाम का संबंध किन्हीं और शब्दों से जुड़ता हो वहाँ पर संबंधबोधक होता है। अथार्त जो शब्द संज्ञा , सर्वनाम आदि शब्दों के साथ आते हैं और वाक्य के अन्य शब्दों के साथ उसका संबंध बताते हैं उन्हें संबंधबोधक कहते हैं। जहाँ पर साथ , पर , तक , के बिना , के पास , से पहले , के सामने , के मारे , के नीचे , के आगे , सिवा , लिए , के साथ , चारों और , पहले , पश्चात ,सिवाय , अलावा , के बाद आते हैं वहाँ पर संबंधबोधक होता है। जैसे :- (i) कमरे के बाहर सामान रखा हो। (ii) मेरे पास आओ। (iii) यह दवा दूध के साथ खाना। (iv) हमलोग घर की तरफ जा रहे हैं। (v) उसका साथ छोड़ दीजिये। (vi) वीर अभिमन्यु अंत तक शत्रु से लोहा लेता रहा। (vii) लाल किले पर तिरंगा लहरा रहा है। (viii) राम के पास कलम है। (ix) छत के नीचे गाय बैठी है। (x) रमेश घर के बाहर पुस्तकें रख रहा था। (xi) राम के आगे मैं खड़ा हूँ। (xii)छत पर राम खड़ा है। संबंधबोधक के भेद :- 1. कालवाचक संबंधबोधक 2. स्थानवाचक संबंधबोधक 3. दिशाबोधक संबंधबोधक 4. साधनवाचक ...

विस्मयादिबोधक

विस्मयादिबोधक की परिभाषा, भेद और उदाहरण विस्मयादिबोधक क्या होता है :- जो शब्द वक्ता या लेखक के हर्ष , शोक , नफरत , विस्मय , ग्लानी आदि भावो का बोध कराता है उसे विस्मयादिबोधक कहते हैं। इसका चिन्ह (!) होता है। जैसे :- (i) अरे ! पीछे हो जाओ , गिर जाओगे। (ii) हाय ! वह भी मार गया। (iii) हाय ! अब मैं क्या करूं। (iv) अरे ! तुम कब आ गए। (v) वाह ! तुमने तो कमाल कर दिया। विस्मयादिबोधक के भेद :- 1. शोकबोधक 2. तिरस्कारबोधक 4. विस्मयादिबोधक 5. संबोधनबोधक 6. हर्षबोधक 7. भयबोधक 8. आशिर्वादबोधक 9. अनुमोदनबोधक 10. विदासबोधक 11. विवशताबोधक 1. शोकबोधक :- जहाँ पर हाय ! , बाप रे बाप ! , हे राम ! , ओह ! , उफ़ ! , त्राहि – त्राहि ! , आह ! , हा ! आते हैं वहाँ पर शोकबोधक होता है। जैसे :- (i) हे राम ! बहुत बुरा हुआ। (ii) हाय ! नाना जी चल बसे। (iii) ओह ! तुम्हे किसने पीटा। 2. तिरस्कारबोधक :- जहाँ पर छि: ! , थू-थू , धिक्कार ! , हट ! , धिक् ! , धत ! , चुप ! आते हैं वहाँ पर तिरस्कारबोधक होता है। जैसे :- (i) धिक्कार ! है तुम पे (ii) धत ! ऐसी बातें नहीं करते। 3. स्वीकृतिबोधक :- जहाँ पर अच्...

क्रिया विशेषण

क्रिया विशेषण की परिभाषा, भेद और उदाहरण शब्द के प्रकार :- (क) विकारी शब्द (ख) अविकारी शब्द (क) विकारी शब्द :- जिन शब्दों में लिंग , वचन और कारक के कारण विकार उत्पन्न हो जाता है उसे विकारी शब्द कहते हैं। (ख) अविकारी शब्द :- जिन शब्दों में लिंग , वचन और कारक के कारण विकार उत्पन्न न हो उसे अविकारी शब्द कहते हैं। क्रियाविशेषण अविकारी शब्द का एक भेद होता है। क्रिया विशेषण :- जिन शब्दों के कारण क्रिया की विशेषता का पता चलता है उसे क्रिया विशेषण कहते हैं। जैसे :- (i) वह धीरे -धीरे चलता है। (ii) खरगोश तेज दौड़ता है। (iii) मेज के ऊपर किताब रखी है। (iv) कुत्ता भागता है। (v) संगीता पढती है। (vi) वह यहाँ रहता है। (vii) हम प्रतिदिन टहलने जाते हैं। क्रियाविशेषण का वर्गीकरण तीन आधारों पर किया गया है :- (1) प्रयोग के आधार पर (2) रूप के आधार पर (3) अर्थ के आधार पर (1) प्रयोग के आधार पर क्रियाविशेषण के भेद :- 1. साधारण क्रियाविशेषण 2. संयोजक क्रियाविशेषण 3. अनुबद्ध क्रियाविशेषण 1. साधारण क्रियाविशेषण :- जिन क्रियाविशेषणों का प्रयोग स्वतंत्र रूप से वाक्य में किया जाता है...

अव्यय

अव्यय की परिभाषा, भेद और उदाहरण अव्यय क्या होता है :- अव्यय का शाब्दिक अर्थ होता है – जो व्यय न हो। जिनके रूप में लिंग , वचन , पुरुष , कारक , काल आदि की वजह से कोई परिवर्तन नहीं होता उसे अव्यय शब्द कहते हैं। अव्यय शब्द हर स्थिति में अपने मूल रूप में रहते हैं। इन शब्दों को अविकारी शब्द भी कहा जाता है। जैसे :- जब , तब , अभी ,अगर , वह, वहाँ , यहाँ , इधर , उधर , किन्तु , परन्तु , बल्कि , इसलिए , अतएव , अवश्य , तेज , कल , धीरे , लेकिन , चूँकि , क्योंकि आदि। अव्यय के भेद :- 1. क्रिया-विशेषण अव्यय 2. संबंधबोधक अव्यय 3. समुच्चयबोधक अव्यय 4. विस्मयादिबोधक अव्यय 5. निपात अव्यय 1. क्रिया-विशेषण अव्यय :- जिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का पता चलता है उसे क्रिया -विशेषण कहते हैं। जहाँ पर यहाँ , तेज , अब , रात , धीरे-धीरे , प्रतिदिन , सुंदर , वहाँ , तक , जल्दी , अभी , बहुत आते हैं वहाँ पर क्रियाविशेषण अव्यय होता है। जैसे :- (i) वह यहाँ से चला गया। (ii) घोडा तेज दौड़ता है। (iii) अब पढना बंद करो। (iv) बच्चे धीरे-धीरे चल रहे थे। (v) वे लोग रात को पहुँचे। (vi) सुधा प्रतिदिन पढती है। (vii...